Friday, December 15, 2017
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सपा के सुप्रीमो मुलायम पर हुआ बड़ा एक्शन – एक आदेश ने डाला मुश्किल में – अखिलेश के उड़े होश

अपराध कितने भी पुराने हो जाएँ , कितना भी उनपर पर्दा डालने की कोशिश की जाय लेकिन एक दिन अपराध की सजा मिलकर रहती है, ऐसा ही अब मुलायम सिंह यादव के साथ हुआ है l मान्यवर का साल 1990 में किया गया पाप एक बार फिर सामने आ गया और इस बार सत्ता उनके बेटे की नहीं है जो उन्हें हर बार की तरह बचा लेगी, इस बार राहें कठिन हैं l

खबर के मुताबिक साल 1990 में कार सेवकों पर खुलेआम गोली चलाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है l राणा संग्राम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 1990 में कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश देने को लेकर उस वक़्त के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है l आपको बता दें निहत्ते कारसेवकों पर निर्मम तरीके से गोलियां बरसाई गयी थीं l

राणा संग्राम सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि 6 फ़रवरी 2014 को मैनपुरी जिले में आयोजित एक जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने खुद कबूल किया है कि उनके ही आदेश पर 1990 में पुलिस ने अयोध्या में निहत्ते कार सेवकों पर गोलियां बरसाई थीं, जिसमें 16 लोग मारे गए थे l यही नहीं मुलायम सिंह यादव ने खुद कहा था कि “मुझे अफ़सोस है लेकिन अगर मैं ऐसा आदेश न देता तो मुस्लिम समुदाय रूठ जाता, उसका देश और हमारे ऊपर से विश्वास ही उठ जाता.”l

एक तरफ मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि इसके बाद उन्होंने नैतिकता के आधार पर सीएम पद से इस्तीफा दिया और दूसरी तरफ एक पुस्तक विमोचन के मौके पर मुलायम सिंह यादव छाती ठोंक कर कहते हैं कि देश हित के लिए और मस्जिद बचने के लिए अगर 16 के बजाए 30 जानें भी चली जातीं तो कोई हर्ज नहीं था l

इतना बड़ा काण्ड हो गया और आज तक उन कारसेवकों को इन्साफ नहीं मिला l यही नहीं अखिलेश सरकार में जब राणा संग्राम सिंह के वक़ील विष्णु जैन ने जब लखनऊ पुलिस में मुलायम सिंह के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया l

आपको जानकर बेहद हैरानी होगी कि पुलिस तो छोड़िये जब लखनऊ की निचली अदालत में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की गयी, तो निचली अदालत तक ने याचिका तक ठुकरा दी l  हद  तो तब हो गयी जब इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा इंसाफ के लिए खटखटाया गया ,तब हाईकोर्ट ने भी 3 मई 2016 को याचिका ठुकरा दी l ये तो हाल तब है जब खुद मुलायम सिंह यादव कबूल कर रहे हैं कि पुलिस को निहत्ते कारसेवकों पर गोली चलने का आदेश उन्ही ने दिया था l

आखिरकार अब जाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है l वक़ील विष्णु जैन के मुताबिक याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्यमंत्री भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे सकते हैं? अगर हां तो किस कानूनी प्रावधान के तहत? क्या पुलिस को भीड़ पर गोली चलाने का अधिकार है?

अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट किसके हक़ में फैसला सुनाता है l हालाँकि आज कल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लोगों को ज़रा संदेह होने लगा है, कभी सिर्फ दिवाली पर पटाखों को बैन करना, तो अभी शिव भक्तों को केवल आधा लीटर पानी और सवा लीटर दूध लेकर केवल 5 बजे तक ही जलाभिषेक की छूट देना जैसे आदेश खलने लगे हैं लेकिन इस मामले में फ़ैसला क्या आता है, यही देखना बाकी है l

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