Wednesday, January 17, 2018
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रामसेतु और भगवान राम को कोरी कल्पना बताने वाली कांग्रेस के गाल पर अमेरिका ने जड़ा तमाचा – किये ये 7 बड़े खुलासे

रामायण में भगवान राम जिस सेतु को पार कर लंका पहुंचे थे, उस रामसेतु को जब देखा गया तो बहस छिड़ गयी और कांग्रेस ने रामसेतु तो क्या भगवान श्री राम तक को कोरी कल्पना बता दिया l 2005 में यूपीए-1 ने शिपिंग कैनाल प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा था और तब बीजेपी ने इस परियोजना का विरोध किया था l बीजेपी ने पुल को नुकसान पहुंचने की बात कही थी l

राहुल गांधी ने गुजरात में चुनाव से पहले 27 मंदिरों के दर्शन कर लिए, लेकिन अफसोस की बात है कि उनकी कांग्रेस पार्टी रामसेतु से लेकर राममंदिर तक हमेशा झूठ ही बोलती रही l आपको याद दिला दें कि ASI यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सितंबर 2007 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में रामायण के चरित्रों पर सवाल उठाए थे l ASI के हलफनामे में कहा गया था कि वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास रचित राम चरित मानस जैसे ग्रंथों को ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं कहा जा सकता l

जब ये विवाद बढ़ा तो भारत सरकार ने हलफनामे को वापस लेते हुए 29 फरवरी 2008 को सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा पेश करके कहा था कि रामसेतु के अस्तित्व को साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका मौजूद नहीं है l याद कीजिये, ये उस समय की बात है जब केंद्र में UPA की सरकार थी l इतना ही नहीं 12 सितंबर 2007 को केंद्र की UPA सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया था l

अब पिछले महीने, यानी 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को इस बारे में हलफनामा दर्ज करने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया है l   सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र को ये साफ करना होगा कि क्या वो राम सेतु पुल को हटाना चाहती है या इसकी रक्षा करना चाहती है l अब इस मामले में बीजेपी इसी महीने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सकती है l

इसके पहले कांग्रेस ने एक शपथ पत्र के आधार पर भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया था l इस शपथ पत्र में कांग्रेस ने कहा था कि भगवान राम कभी पैदा ही नहीं हुए थे l

भगवान राम और रामचरितमानस हमारे देश के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है l हमारे देश के लोग रामायण को पढ़ते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन हमारे ही देश में एक दौर ऐसा था भारत सरकार ने श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठा दिए थे l

अब अमेरिका ने कांग्रेस के गाल पर क़रारा तमाचा जड़ा है l अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है कि रामसेतु महज़ कोरी कल्पना नहीं है l अमेरिका के साइंस चैनल ने भूगर्भ वैज्ञानिकों, आर्कियोलाजिस्ट की अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच रामसेतु के संकेत मिलते हैं l

सैटेलाइट से प्राप्त चित्रों के अध्ययन के बाद कहा गया है कि भारत-श्रीलंका के बीच 30 मील के क्षेत्र में बालू की चट्टानें पूरी तरह से प्राकृतिक हैं, लेकिन उन पर रखे गए पत्थर कहीं और से लाए गए प्रतीत होते हैं। यह करीब सात हजार वर्ष पुरानी हैं जबकि इन पर मौजूद पत्‍थर करीब चार-पांच हजार वर्ष पुराने हैं।

हिंदुओं धार्मिक ग्रंथ रामायण के मुताबिक भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच उथली चट्टानों की एक चेन है। इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है। समुद्र में इन चट्टानों की गहराई सिर्फ 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है। इसे भारत में रामसेतु व दुनिया में एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है।

इस पुल की लंबाई लगभग 48 किमी है। रामसेतु भौतिक रूप में उत्तर में बंगाल की खाड़ी को दक्षिण में शांत और स्वच्छ पानी वाली मन्नार की खाड़ी से अलग करता है, जो धार्मिक एवं मानसिक रूप से दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ता है।

रामसेतु ब्रिज हमेशा से ही चर्चा में बना रहा है और अब इस ऐतिहासिक पुल पर अब अमेरिकी टीवी चैनल ने बड़ा खुलासा किया है l उन्होंने रामसेतु ब्रिज के अस्तित्व में होने का संकेत दिया है l

दरअसल, अमेरिकी टीवी चैनल ‘साइंस’ ने रामसेतु ब्रिज को लेकर एक प्रोग्राम बनाया है, जिसके प्रोमो में भारत-श्रीलंका के बीच मानव निर्मित पुल का अस्तित्व होने का संकेत दिया गया है l चैनल ने वैज्ञानिक तथ्यों को आधार में रखते हुए दोनों देशों को जोड़ने के लिए एक पुल के होने का दावा है l इस कार्यक्रम को 13 दिसंबर यानि आज ऑनएयर किया जाएगा l

चैनल ने टि्वटर पर प्रोमो शेयर करते हुए लिखा, क्या हिंदुओं के बीच चर्चित भारत और श्रीलंका को जोड़ने के लिए पुल होने का दावा सच है? वैज्ञानिक विश्लेषण उसकी मौजूदगी की ओर संकेत करता है l वीडियो में अमेरिकी पुरातत्व विशेषज्ञों के हवाले से दावा है कि पंबन और मन्नार द्वीप के बीच 50 किमी की दूरी पर पुल है l

साइंस चैनल ने सोमवार को एक वीडियो ट्विटर पर डाला, जो देखते ही देखते भारत में वायरल हो गया। वीडियो में कुछ भूविज्ञानियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रामसेतु पर पाए जाने वाले पत्थर बिल्कुल अलग और बेहद प्राचीन हैं।  

भूविज्ञानी ऐलन लेस्टर के मुताबिक, ‘हिंदू धर्म में भगवान राम  द्वारा ऐसे ही एक सेतु के निर्माण का जिक्र है। इस पर शोध करने पर पता चला कि बलुई धरातल पर मौजूद ये पत्थर कहीं और से लाए गए हैं।’ हालांकि ये पत्थर कहां से और कैसे आए, यह आज भी एक रहस्य है।

पुरातत्वविद चेल्सी रोज़ कहती हैं, ‘जब हमने इन पत्थरों की उम्र पता की, तो पता चला कि ये पत्थर उस बलुई धरातल से कहीं ज्यादा पुराने हैं, जिस पर ये मौजूद हैं।’ ये पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं, वहीं जिस बलुई धरातल पर ये मौजूद हैं वह महज 4000 साल पुराना है।

चैनल का दावा है कि इस स्टडी से स्पष्ट होता है यह ढांचा प्राकृतिक तो नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा बनाया गया है। चैनल के मुताबिक, कई इतिहासकार मानते हैं कि इसे करीब 5000 साल पहले बनाया गया होगा और अगर ऐसा है, तो उस समय ऐसा कर पाना सामान्य मनुष्य के लिहाज से बहुत बड़ी बात है।

वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद रामसेतु को लेकर ये 7 बड़े खुलासे किए हैं-: 

  1. अमेरिका के साइंस चैनल का दावा-रामसेतु कोरी कल्पना नहीं हो सकता l
  2. वैज्ञानिक ऐलन लेस्टर ने कहा, हिंदू धर्म में जिक्र भगवान राम ने ऐस ही सेतु बनाया l
  3. चैनल का दावा- भारत और श्री लंका के बीच मौजूद पत्थर करीब 7 हजार साल पुरानी, जमीन के ऊपर बालू 4 हजार साल पुरानी l

 

  1. चैनल का दावा, ये ढांचा प्राकृतिक नहीं है, इंसानों द्वारा बनाए गए हैं l
  2. वैज्ञानिकों का दावा- रामसेतु पर पाए जाने वाले पत्थर बिल्कुल अलग और बेहद प्राचीन l
  3. पुरातत्वविद चेल्सी रोज का दावा, पत्थरों की उम्र पता की तो पता चला ये पत्थर बलुई धरातल से कहीं ज्यादा पुराने l
  4. वैज्ञानिक ऐलन लेस्टर ने कहा, रिसर्च करने पर पता चला, बलई धरातल पर मौजूद ये पत्थर कहीं और से लाए गए l

गौरतलब है कि इस प्रोग्राम का प्रोमो ऑनएयर होने के बाद स्मृति ईरानी ने वीडियो को री-ट्वीट करते हुए ‘जय श्रीराम’ लिखा है l

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