Friday, December 15, 2017
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“हाई अलर्ट” – चीन को जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना ने संभाला मोर्चा – कर ली ये ख़ास तैयारी

डोकलाम में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच भारतीय वायुसेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है l गुपचुप तरीके से भारत ने चीन को सबक सिखाने के लिए कुछ ख़ास तैयारियां कर रखी हैं l न्यूज़ स्पिरिट आपको बता दें कि एक ज़िम्मेदार मीडिया होने के नाते हम आपसे वही ख़ास जानकारियां साझा करेंगे, जिससे देश की सुरक्षा को कोई खतरा न हो, और सेना की अहम् जानकारियाँ भी गुप्त रहें l

चार सैनिक देख कर जब हालत पतली हो गयी थी चीन की तो क्या होगा सोचो ..

दरअसल डोकलाम विवाद पर चीन के साथ पिछले दो महीने से चल रही रस्साकशी के बीच भारत ने सिक्किम, अरुणाचल से लगी चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है  और शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी l डोकलाम में पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के साथ जारी तनातनी के बीच भारत ने चीन से सटे प्रदेशों में सेना की मौजूदगी बढ़ा दी है। जवानों को सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में चीन से सटी सीमाओं के ‘ऑपरेशनल अलर्ट’ एरिया में तैनाती कर दिया गया है।

तैयारियां सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं हैं। इसके अलावा लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक फैले 4,057 किमी लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भी सर्तकता हाई लेवल पर बढ़ा दी है। खास बात यह है कि भारत ने सारी तैयारियां बेहद खामोशी से की हैं। चीन की ओर से लगातार भड़काऊ बयानों के बावजूद भारत ने अभी तक बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है।

पूर्वी हिस्से की बात करें तो यहां सुकना में 33 कॉर्प्स का मुख्यालय है और इसके अंतर्गत 17 (गंगटोक), 27 (कलिमपोंग) और 20 ( बिनागुड़ी) माउंटेन डिविजन आते हैं। हर डिविजन में 10 से 15 हजार सैनिक हैं। ये सैनिक ऊंची जगह के मौसमी हालात के अनुकूल ढले हुए हैं।

भारतीय सेना ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए समान सैन्य संसाधन वाले 3 कॉर्प्स (दीमापुर), 4 कॉर्प्स (तेजपुर) और इनके अंतर्गत आने वाले माउनटेन डिविजन को भी ऐक्टिवेट कर दिया है। 4 कॉर्प्स वही टुकड़ी है, जिसने 1962 की जंग में चीनी फौज से मोर्चा लिया था। उधर, खबर है कि चीन ने भी एलएसी के नजदीक अपनी तरफ सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है।

इसके अलावा, नॉर्थ ईस्ट के इलाकों में इंडियन एयरफोर्स के हवाई बेसों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। ख़बरों के मुताबिक़ ये विमान नियमित तौर पर ‘कॉम्बैट एयर पट्रोल्स’ जैसे अभ्यास में जुटे हुए हैं। आपको बता दें कि भारत ने ये सारी तैयारियां यूं ही नहीं कीं हैं l जुबानी हमले के अलावा चीन ने तिब्बत मिलिटरी डिस्ट्रिक्ट में टैकों और आर्टिलरी का जमावड़ा बढ़ा दिया है।

हालांकि, टकराव का असल इलाका तो 1 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित डोकलाम है, जहां चीन भूटान के इलाके पर कब्जा करने की कोशिश में है। उसका मकसद संकरी चुंबी घाटी में सामरिक बढ़त हासिल करना है। डोकलाम में इस वक्त दोनों पक्षों की ओर से 300-350 सैनिक आमने-सामने खड़े हैं। वहीं, पीएलए ने टकराव वाले इलाके से थोड़ा ही पीछे 1500 अन्य सैनिकों को तैनात कर रखा है।

एक अधिकारी के मुताबिक़ सीमा पर तैनात सैनिकों को सावधान रहने को कहा गया है l उन्होंने कहा कि डोकलाम पर चीन के आक्रामक रूख को देखते हुए स्थिति के गहन विश्लेषण के बाद यह फैसला लिया गया है l  इसके अलावा 1400 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर सिक्किम से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक तैनात सैनिकों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है l

ख़बर ये भी है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों और सेना को चीन की तरफ से कुछ बेहद संवेदनशील जानकारियां मिली हैं और जिसके बाद जवानों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया है l भारत-चीन सीमा की ईस्टर्न थियेटर की सुरक्षा के लिए अरुणाचल और असम में तैनात 3 और 4 कॉर्प्स के जवानों के साथ सेना की सुकना स्थित 33 कॉर्प्स को भी चीन सीमा पर भेजा गया है l

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अनुमानित रूप से 45 हजार जवानों ने वेदर एक्लीमेटाइजेशन प्रोसेस (इसके तहत जवानों को अलग-अलग तापमान में ट्रेनिंग कराया जाता है) को पूरा किया है और इसका मतलब जवानों को किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने के लिए होता है, लेकिन कोई जरूरी नहीं है सभी जवानों को सीमा पर तैनात ही किया जाए l

सैनिकों को 9 हजार फीट ऊंचाई पर तैनात किया गया और नौ दिनों तक एक्लीमेटाइजेशन की प्रक्रिया चली l हालांकि अधिकारियों ने कहा कि भारत-चीन-भूटान के त्रिकोण पर डोकलाम में तैनात सैनिकों की संख्या में कोई इजाफा नहीं किया गया है l

आपको बता दें कि भारत के 350 जवान डोकलाम में अपनी पोजिशन संभाले हुए हैं l गौरतलब है कि 16 जून को चीन की ओर से कराए जा रहे सड़क निर्माण के कार्य को भारतीय सैनिकों ने रोक दिया था और तब से लगातार आठ हफ्ते से भारतीय सैनिक अपनी भूमिका निभा रहे हैं l

भूटान और चीन डोकलाम पर दावा करते रहे हैं और अब दोनों के बीच इस मुद्दे पर बात चल रही है l चीन इस मुद्दे पर पिछले कुछ हफ्ते से भारत के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहा है और चीन की मांग है कि भारत डोकलाम से तुरंत अपने सैनिक वापस बुलाए l उधर चीनी मीडिया डोकलाम मुद्दे भारत की आलोचना करते हुए लगातार लेख छाप रही है l

इससे पहले विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा था कि दोनों देश अपनी सेनाएं वापस बुलाएं और सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालें l भारत ने चीन के साथ इस बात को जाहिर कर चुका है कि डोकलाम में सड़क निर्माण से यथास्थिति में बदलाव आएगा और इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं प्रभावित होंगी l

सूत्रों के मुताबिक भारत और चीन की सेनाओं के बीच मेजर जनरल स्तर की बातचीत बेनतीजा रही है और चीन अपनी जिद पर अड़ा रहा कि भारत पहले अपनी सेना को वापस बुलाए l वहीं सूत्रों को कहना है कि भारत ने जोर देकर कहा कि जब तक चीन सड़क निर्माण के औजार नहीं हटाता, तब तक सेना के वापस हटने का सवाल नहीं उठता और दोनों देशों की सेनाओं ने मामले को अपनी सरकारों के सामने उठाने की बात कही l

गौरतलब है कि सीमा पर भारत सिर्फ सैन्य तैयारियां ही मजबूत नहीं कर रहा। इस बीच, इंडियन आर्मी और पीएलए के बीच नियमित फ्लैग मीटिंग्स के जरिए तनाव को खत्म करने की कोशिशें भी जारी हैं। एक टॉप लेवल फ्लैग मीटिंग नाथू ला दर्रे के पास दोनों पक्षों के मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच शुक्रवार को हुई। हालांकि, इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

इससे पहले पिछली मीटिंग भी बेनतीजा रही थी क्योंकि भारत इस इलाके से चीनी सेना द्वारा सड़क निर्माण का सामान हटाए जाने की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं, चीन ने भी भारत को अपनी सेनाएं हटाने के लिए कहा है। अब सबकी नजरें दोनों सेनाओं के बीच 15 अगस्त को होने वाली सेरेमोनियल बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग्स (BPMs) पर है। वर्तमान में हालात तनावपूर्ण है, ऐसे में यह बैठक होती है कि नहीं, ये देखना होगा।

 

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