Wednesday, January 17, 2018
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पटाखा बिक्री बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिर सुनाया ये बड़ा फ़ैसला – सदमे में हिन्दू संगठन – कट्टरपंथियों में दौड़ी ख़ुशी की लहर

दिल्ली एनसीआर में पटाखा बिक्री बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक और नया फ़ैसला सुनाया है l सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से जहाँ मोदी सरकार और तमाम हिंदूवादी संगठनों को तगड़ा झटका लगा है, वहीँ कट्टरपंथियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है l

दरअसल देश में अवैध रूप से देश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश की सुरक्षा, आर्थिक हितों की रक्षा जरूरी है,  लेकिन इसे मानवता के आधार से भी देखना चाहिए l सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा संविधान मानवता के आधार पर बना है l

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह अगली सुनवाई तक कोई एक्शन ना ले और ना ही रोहिंग्या को वापस भेजे और इस मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी l

आपको बता दें कि कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं बल्कि कानूनी बिन्दुओं पर आधारित होनी चाहिए, जबकि आज कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मानवीय पहलू और मानवता के प्रति चिंता के साथ-साथ परस्पर सम्मान होना भी जरूरी है l

शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क तैयार करने को कहा l सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मानवीय मूल्य हमारे संविधान का आधार है और देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा जरूरी है, लेकिन पीड़ित महिलाओं और बच्चों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई तक इन्हें वापस भेजने का फैसला न ले। रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उन्हें भारत से वापस भेजने को कहा गया है। आपको बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा सहित तीन जजों की बेंच रोहिंग्या शरणार्थियों की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं। बेंच ने कहा है कि वह इस मामले में विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल किया है कि यह मामला कार्यपालिका का है और सर्वोच्च न्यायालय इसमें हस्तक्षेप न करे।

सरकार ने अपने हलफ़नामे में रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि ये भारत में नहीं रह सकते। सरकार ने कहा है कि उसे ख़ुफ़िया जानकारी मिली है कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि इस मामले में दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं, बल्कि कानूनी बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए।

इसके अलावा दिल्ली एनसीआर में पटाखा बिक्री बैन के बाद सोशल मीडिया पर इस फ़ैसले को हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं से जोड़ने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और जस्टिस ए.के. सीकरी ने कहा कि “हम यह सुनकर बेहद दुखी हैं कि कुछ लोग हमारे आदेश को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। कोई भी जो मुझे जानता है उसे पता है कि इन मामलों में मैं बहुत धार्मिक व्यक्ति हूं” l

आपको बता दें कि इस से पहले मशहूर हस्तियों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला ख़त लिखा गया है और इस ख़त में केंद्र सरकार से म्यांमार में जारी हिंसा के बीच रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके देश नहीं भेजने की अपील की गई है l

इस खुले ख़त में म्यांमार में रोहिंग्या के खिलाफ हो रही हिंसा और अत्याचारों का हवाला देते हुए पीएम मोदी से अपील की गई कि उन्हें भारत में रहने दिया जाए l इस ख़त पर मशहूर वकील प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, सांसद शशि थरूर, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़  पत्रकार करन थापर, सागरिका घोष, अभिनेत्री स्वरा भास्कर समेत कुल 51 मशहूर हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं l

इसके बाद रोहिंग्या मुस्लिमों के पक्ष में दायर की गई याचिका में केंद्र के इस रुख का विरोध किया कि याचिका न्यायालय में विचार योग्य नहीं है l चीफ जस्टिस दीपक्ष मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पक्षों से कहा है कि केंद्र और दो रोहिंग्या याचिकाकर्ताओं कोर्ट की मदद के लिये सारे दस्तावेज और अंतरराष्ट्रीय कंवेन्शन का विवरण तैयार करें l

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दिया था और देश में अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों से देश को खतरा बताया था l 16 पन्ने के इस हलफ़नामे में केंद्र ने कहा था कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क हैं और ऐसे में ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं और इन अवैध शरणार्थियों को भारत से जाना ही होगा l

रोहिंग्या शरणार्थियों ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार के कदम को समानता के अधिकार के ख़िलाफ़ बताया है और उन्होंने कहा है कि हम गरीब हैं और मुसलमान हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है l रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को भारत से बाहर निकाले जाने के सरकार के कदम पर समुदाय ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि उनका आतंकवाद और किसी आतंकी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है l

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