Wednesday, January 17, 2018
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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का एक और धमाकेदार फ़ैसला – देखकर कांग्रेस के उड़े होश – विपक्ष भी हुआ परेशान

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर एक ज़बरदस्त फ़ैसला लिया है l रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के इस फैसले ने कांग्रेसियों को हैरान कर दिया है, जबकि जवानों में ख़ुशी की लहर है l

दरअसल रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अंडमान निकोबार द्वीप में स्थित सैन्य रूप से महत्वपूर्ण तीनों सेनाओं (थल, वायु एवं नौसेना) के कमान में सैन्यकर्मियों के साथ दीवाली मनाएंगी l आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि रक्षा मंत्री 24 और 25 अक्टूबर को फिलीपीन की यात्रा पर होंगी और खासकर समुद्री क्षेत्र में सैन्य सहयोग मजबूत करने के तरीके तलाशने के लिए इस दौरान वहां के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत करेंगी l रक्षा मंत्री के तौर पर यह उनका पहला विदेश दौरा होगा l

ख़बरों के मुताबिक निर्मला 18 अक्टूबर को अंडमान निकोबार द्वीप की यात्रा पर जाएंगी और 19 अक्टूबर को तीनों सेवाओं के कर्मियों के साथ उत्सव मनाएंगी l यात्रा के दौरान उनके तीनों सेनाओं वाले देश के एकमात्र कमान की अभियान संबंधी तैयारियों का जायजा लेने की भी उम्मीद है l

इस ख़बर के सामने आने के बाद कांग्रेस परेशान सी है, क्योंकि कांग्रेसी रक्षामंत्रियों ने कभी ऐसा नहीं किया और जवानों का उत्साह बढ़ाने के लिए कभी भी उनके साथ किसी त्यौहार को नहीं मनाया l मोदी सरकार में खुद पीएम मोदी भी कई बार जवानों के साथ त्योहारों के दौरान शामिल रहे हैं और अब रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने ये फ़ैसला लिया है l

आपको बता दें कि कुछ ही दिनों पहले रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की “नमस्ते डिप्लोमेसी” की काफी चर्चा हुई थी और चीनी मीडिया निर्मला सीतारमण की मुरीद हो गयी थी l इस दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नाथुला के दौरे पर थीं l

चीनी मीडिया ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के इस कदम का स्वागत किया था और हांगकांग आधारित अखबार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने सीतारमण के नाथुला दौरे को लेकर प्रकाशित खबर में कहा कि ‘भारतीय रक्षा मंत्री ने चीन सैनिकों के साथ सेतु का निर्माण करने का काम किया है.’l

इस दौरे के बारे में विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, था कि ‘‘चीन-भारत सीमा का सिक्किम सेक्टर 1890 की ऐतिहासिक संधि द्वारा परिसीमित हुआ था और नाथुला दर्रा इस तथ्य का बेहतरीन साक्षी है l उन्होंने कहा था कि ‘‘चीनी पक्ष ऐतिहासिक संधियों और संबंधित समझौतों के आधार पर भारतीय पक्ष के साथ मिलकर सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द बरकरार रखने का इच्छुक है.’’  l

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