Wednesday, January 17, 2018
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पश्चिम बंगाल से बीजेपी के लिए आई बड़ी ख़बर – इस सर्वे ने किया हैरान – ममता और वाम भी परेशान

पहले वाम और अब ममता के गढ़ माने जाने वाले पश्चिम बंगाल से बीजेपी के लिए बड़ी ख़बर आई है l इस ख़बर के बाद वामपंथियों और पश्चिम बंगाल में मजबूती के साथ डटी हुई ममता बनर्जी को झटका लग सकता है l ख़बर ये है कि अगर आंकड़ों पर भरोसा करें तो पश्चिम बंगाल में बीजेपी एक बेहतर हालात में इस वक़्त कड़ी है और लगातार मज़बूत हो रही है l

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में मजबूत होने के साथ ही मुख्य विपक्षी दल बनकर भी उभर रही है। प्रदेश के सात जिलों में पिछले महीने हुए निकाय चुनाव में भाजपा दूसरा सबसे मजबूत दल रहा और इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी सीपीएम के बाराबर सीटें लेकर भाजपा अपनी ताकत दिखा चुकी है। पिछले तीन लोकसभा चुनाव के परिणाम देखे जाएं तो यह पार्टी के लिए बड़ी सफलता है, हालांकि 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ निराशा लगी है।

केंद्र में सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा तेजी से हर राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए सक्रिय है l बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उसे निराशा मिली थी लेकिन बिहार में अब बीजेपी और जेडीयू की साझा सरकार है l बात पश्चिम बंगाल की करें तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के लिए पार्टी ने कमजोर संगठन को जिम्मेदार माना। हालांकि सेंटर फॉर द डेवलपिंग सोसायटी के सर्वे से पता चला कि भाजपा की हार का बड़ा कारण उसके पास सीएम का कोई चेहरा न होना था।

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सामने आया था कि तब 38 फीसदी लोग मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी को देखना चाहते थे जबकि सीपीएम के सूर्यकांत मिश्रा को 11.8 फीसदी लोगों ने सीएम के तौर पर पसंद किया था l इस सबके इतर भाजपा के सीएम के दावेदार के पक्ष में एक फीसदी वोट भी नहीं पड़ा था।

वैसे  2016 का विधानसभा चुनाव भाजपा से अधिक सीपीएम के लिए निराशाजनक रहा था और उसकी वज़ह ये थी कि 34 साल से 2011 तक लगातार प्रदेश में सत्ता में रहा यह दल तीसरे नंबर पर चला गया था l कांग्रेस के हिस्से में सीपीएम से भी अधिक सीटें आईं।

इसके बाद पिछले महीने में सात जिलों में हुए निगम चुनाव में भी सीपीएम अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस नहीं पा सका और सभी निगमों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल रहा। इन परिणामों से एक बात साफ़ हुई कि ममता और बीजेपी दोनों दलों ने कांग्रेस और सीपीएम के वोटों पर सेंध लगाई है।

अब पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव पर भाजपा की नजर है। इससे राजनीतिक परिदृश्य अधिक साफ होगा और पता चलेगा कि भाजपा तृणमूल कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन सकती है। प्रदेश में भाजपा जिन जगहों पर कमजोर है वहां विस्तार के लिए तीन नीतियों पर काम कर रही है। राज्य में मजबूत अन्य संगठनों से गठबंधन, दल को मजबूत करने के लिए कुछ जगहों पर समझौता और पार्टी छोड़ चुके अन्य दलों के जनाधार वाले नेताओं को भाजपा में शामिल करना।

जम्मू-कश्मीर, असम और मणिपुर में भाजपा ने अन्य दलों के नेताओं को जिस तरह अपने साथ शामिल किया था वही परिदृश्य अब पश्चिम बंगाल में भी बनता नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस के सह संस्थापक और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय ने कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहा है। कुछ हफ्ते पहले ही सीपीएम ने अपने राज्यसभा सदस्य रितबरिता बनर्जी को भी पार्टी से बेदखल किया है।

ख़बर ये है कि भाजपा इन चेहरों को अपने साथ शामिल कर सकती है। सीपीएम के पूर्व सांसद लक्ष्मण सेठ को पिछले साल भाजपा में शामिल हो ही चुके हैं और अगर इन नेताओं को भी बीजेपी अपने साथ लाने में कामयाब रही तो पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका सीधा लाभ मिलेगा।

अगर एक नज़र साल 2006 से 2014 के बीच सूबे में हुए चुनावों के वोट प्रतिशत पर डालें तो ये बात और साफ़ हो जाती है कि राज्य में बीजेपी तेजी से अपना ग्राफ बढ़ा रही है l

2006 से 2014 के बीच पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों में दलों के वोट प्रतिशत की स्थिति

पार्टी            2006    2009   2011  2014   2016

टीएमसी       26.6    31.2      38.9   39.8    45.6

सीपीएम       37.1     33.1      30.1   23      20.1

कांग्रेस         14.7     13.5     9.1     9.7     12.4

भाजपा          …-.       6.1      4.1     17     10.3

इस सबको देखते हुए एक बात साफ़ हो जाती है कि अब बीजेपी की नज़र पश्चिम बंगाल पर है और अगर पार्टी इसी तरह से बढ़ती रही तो ये ममता के लिए खतरे की घंटी हो सकती है l

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