Wednesday, January 17, 2018
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मीडिया के सामने आये जजों ने सार्वजनिक की ये चिट्ठी – 7 पन्नों की चिट्ठी में छिपे हैं कई अहम सुराग – पीएम मोदी ने लिया ये बड़ा फ़ैसला

आज़ाद भारत के इतिहास में ये पहली दफ़ा हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के जज मीडिया के सामने आये और इन जजों ने कई अहम बातें बताते हुए 4 पन्नों की एक चिट्ठी सार्वजनिक की l ये चिट्ठी इन जजों माननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को लिखी थी l

आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट  के 4 जजों ने शुक्रवार को मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित 7 पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के असाइनमेंट को लेकर नाराजगी जताई है। आपको बता दें कि जजों का आरोप है कि चीफ जस्टिस की ओर से कुछ मामलों को चुनिंदा बेंचों और जजों को ही दिया जा रहा है।

‘हम बेहद कष्ट के साथ आपके समक्ष यह मुद्दा उठाना चाहते हैं कि अदालत की ओर से दिए गए कुछ फैसलों से न्यायपालिका की पूरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कामकाज पर भी असर पड़ा है।’

अगले पैरे में जजों ने लिखा कि  ‘स्थापना के समय से ही कोलकाता, बॉम्बे और मद्रास हाई कोर्ट में प्रशासन के नियम और परंपरा तय थे। इन अदालतों के कामकाज पर इस अदालत के फैसलों ने विपरीत प्रभाव डाला है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की स्थापना तो खुद इन उच्च न्यायालयों के एक सदी के बाद हुई थी।’

पत्र में कहा गया है कि ‘सामान्य सिद्धांत है कि चीफ जस्टिस के पास रोस्टर तैयार करने का अधिकार होता है और वह तय करते हैं कि कौन सी बेंच और जज किस मामले की सुनवाई करेगी। हालांकि यह देश का न्यायशास्त्र है कि चीफ जस्टिस सभी बराबर के जजों में प्रथम होता है, न ही वह किसी से बड़ा और न ही छोटा होता है।’

जजों ने अपने पत्र में लिखा है कि  ‘ऐसे भी कई मामले हैं, जिनका देश के लिए खासा महत्व है, लेकिन, चीफ जस्टिस ने उन मामलों को तार्किक आधार पर देने की बजाय अपनी पसंद वाली बेंचों को सौंप दिया। इसे किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए।’

पत्र में यह भी लिखा गया है कि यह संस्थान की प्रतिष्ठा को हानि न पहुंचे, इसलिए मामलों का जिक्र नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसकी वजह से पहले ही न्यायपालिका की संस्था की छवि को नुकसान हो चुका है।

गौरतलब है कि न्यायपालिका में ये पहला मौका होगा जब सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया l चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है l  सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी l उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी l

जजों ने बताया कि चार महीने पहले हम सभी ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जो कि प्रशासन के बारे में थे, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे लेकिन उन मुद्दों को अनसुना किया गया l

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों ने कहा कि चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं l जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए l

आपको बता दें कि आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में पदस्थ 4 वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेंस की l इन जजों ने न्यायपालिका में जारी भ्रष्टाचार पर अपनी बात रखी l

प्रेस कांफ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट के ये 4 वरिष्ठ जज हैं जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंगन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ l यह कांफ्रेंस जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर के आवास पर आयोजित हुई और भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश के वरिष्ठतम जजों में से 4 जज मीडिया के जरिए देश के सामने मुखातिब हुए l

आइए, एक नजर डालते हैं इन 4 वरिष्ठ जजों पर

जस्ती चेलमेश्वर:

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर केरल और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं l उन्हें वकालत विरासत में मिली l भौतिकी विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने 1976 में आंध्र युनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की l अक्टूबर, 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे l

जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर और रोहिंगटन फली नरीमन की 2 सदस्यीय बेंच ने उस विवादित कानून को खारिज किया जिसमें पुलिस के पास किसी के खिलाफ आपत्तिजनक मेल करने या इलेक्ट्रॉनिक मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार करने का अधिकार था l उन्होंने इस नियम पर लंबी बहस की बात कही थी l

उनके इस फैसले की देशभर में जमकर तारीफ हुई और बोलने की आजादी को कायम रखा l इसके साथ ही, चेलमेश्वर ने जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइन्ट्मन्ट्स कमीशन (NJAC) का समर्थन किया, साथ ही वह पहले से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था की आलोचना कर चुके हैं l

जस्टिस रंजन गोगोई:

जस्टिस रंजन गोगोई असम से आते हैं और वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों में शामिल हैं, और वरिष्ठता के आधार पर अक्टूबर, 2018 में वह देश की सबसे बड़ी अदालत में जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं l ऐसा हुआ तो वह भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर काबिज होने वाले पहले जस्टिस होंगे l

उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट से करियर की शुरुआत की l वह फरवरी, 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने l अप्रैल, 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने l आपको बता दें कि उनके पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रहे हैं l

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर:

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर की स्कूली शिक्षा नई दिल्ली में हुई l  उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की और इसके बाद में उन्होंने दिल्ली से ही कानून की डिग्री हासिल की l 1977 में उन्होंने अपने वकालत करियर की शुरुआत की l  इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत की l

2010 में वह फरवरी से मई तक दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे और इसके बाद अगले महीने जून में वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश पद पर चुन लिए गए l इसके बाद वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के भी मुख्य न्यायधीश रहे l

जस्टिस कुरियन जोसेफ:

जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 1979 में अपनी वकालत करियर की शुरुआत कीl सन 2000 में वह केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चुने गए और इसके बाद फरवरी, 2010 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली l 8 मार्च, 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने l

उधर इन जजों के मीडिया के सामने आने के बाद सरकार में हड़कंप मच गया l सिटिंग जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुंरत बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है l विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है l

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि ये बहुत ही गंभीर मामला है l उन्होंने कहा कि जजों ने बहुत बलिदान दिए हैं और उनकी नीयत पर सवाल नहीं उठाए जा सकते l स्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की मांग की है l

वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने इस पूरे मामले पर कहा कि ये न्यायपालिका के लिए काला दिन है l आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हर कोई न्यायपालिका के फ़ैसले को शक की निगाहों से देखेगा l उन्होंने कहा कि अब से हर फ़ैसले पर सवाल उठने शुरू हो जाएंगे l

ख़बर ये भी है इस इस मामले पर पीएम मोदी ने तुरंत दख़ल दिया है और पीएम मोदी ने देश के क़ानून मंत्री और राज्य मंत्री दोनों को तलब कर लिया है l

जजों के आरोपों और चिट्ठी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से फोन बात की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का मानना है कि उसे इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि यह शीर्ष अदालत का अंदरुनी मामला है और इसमें सरकार पक्ष नहीं है।

वहीं, पूरे मामले को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की है। इस बीच बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि मीडिया के समक्ष आने वाले 4 जजों ने अपना दर्द बयां किया है तो निश्चित तौर पर उन्हें पीड़ा होगी।

स्वामी ने कहा कि जजों ने चीफ जस्टिस पर सवाल उठाया है और उनके बीच विवाद है। इसलिए अब पीएम नरेंद्र मोदी को ही इस मामले में दखल देना चाहिए। स्वामी ने कहा कि मीडिया के समक्ष बात रखने वाले चारों जज बुद्धिजीवी हैं और उनकी बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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