Wednesday, January 17, 2018
Home > दुनिया > चीन ने फिर दिखायी हेकड़ी – भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाला – पीएम मोदी ने भी दिया ऐसा जवाब कि याद रखेगा चीन

चीन ने फिर दिखायी हेकड़ी – भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाला – पीएम मोदी ने भी दिया ऐसा जवाब कि याद रखेगा चीन

भारत और चीन का डोकलाम में चल रहा विवाद ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा l हांलाकि चीन धमकियाँ रोज़ ज़रूर दे रहा है लेकिन ये उसे पता है कि अगर उसने भारत पर हमला करने की हिमाक़त की तो वो कहीं का नहीं रह जायेगा l अव्वल तो भारत अकेला ही अब दुनिया में एक महाशक्ति बन चुका है, दूसरा दुनिया के तमाम ताक़तवर देश भी इस वक़्त भारत के साथ खड़े हैं l ऐसे में अगर चीन ने भारत की तरफ आँख उठाकर भी देखा तो उसे नेस्तोनाबूद कर दिया जाएगा l

हालांकि दोनों देशों बीच शीत युद्ध जारी है और अब ये ईरान तक पहुँच गया है l भारत को नीचा दिखाने के लिए चीन ने एक और चाल चली है और चीन की इस चाल का जवाब भारत ने भी जोरदार तरीके से दिया है l भारत के जवाब के बाद अब चीन को अपनी ही चाल खुद पर भारी पड़ती दिख रही है l

दरअसल डोकलाम मामले पर तनाव के कारण चीनी टेलीकॉम कंपनी हुवावे ने ईरान में अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया l दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से एक हुवावे ने तेहरान में काम करने वाले अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से इसलिए निकाल दिया क्योंकि भारत डोकलाम मामले में पीछे नहीं हट रहा है l

आईबी टाइम्ज़ की जानकारी के मुताबिक़ भारत और चीन के बीच सीमावर्ती विवाद के कारण इस कंपनी में काम करने वाले भारतीयों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा l तेहरान में हुवावे कंपनी में काम करने वाले रोहित ने ट्विटर पर भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को संबोधित करते हुए एक ट्वीट किया और जिसमें लिखा कि हुवावे ईरान ने अपने सभी भारतीय कर्मचारियों को निकाल दिया है और यह व्यापार से जुड़ा हुआ फ़ैसला नहीं है l


ये ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो गयी और लोगों ने चीन के इस कदम की कड़ी निंदा की l इसके फ़ौरन बाद भारत में मोदी सरकार ने ऐसा जबरदस्त फ़ैसला लिया, जिसे देख चीन को समझ आ गया कि भारत में वाकई अब एक बहुत मज़बूत सरकार है l

सरकार ने पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में नई कंपनियों की एंट्री के नियमों को कड़ा करने का फैसला ले लिया है l सरकार और इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील सेक्टर्स में चीन की बढ़ती पैठ पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा किया जा रहा है l हार्बिन इलेक्ट्रिक, डॉन्गफैंग इलेक्ट्रॉनिक्स, शंघाई इलेक्ट्रिक और सिफांग ऑटोमेशन जैसी कई दिग्गज चीनी कंपनियां देश के 18 शहरों में उपकरणों की सप्लाई कर रही हैं या फिर विद्युत वितरण का प्रबंधन कर रही हैं l

दरअसल, सरकार भारत में बड़े स्तर पर व्यापार कर रहे चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है। इलेक्ट्रिसिटी, टेलिकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स इक्विपमेंट्स की आपूर्ति से जुड़े नियमों को सरकार कस रही है, जिससे चाइनीज फर्म्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट्स पाना और दाखिल होना मुश्किल हो जाएगा।

बिजली का झटका
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) देश के पावर स्टेशन्स और स्मार्ट ग्रिड सिस्टम्स को साइबर हमलों से बचाने के लिए जैसा रोडमैप तैयार कर रही है और उससे चीनी कंपनियों के लिए इसमें हिस्सा लेना मुश्किल हो जाएगा।

दिलचस्प यह है कि, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था कि यह सरकार भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट्स देते समय ‘परस्पर आदान-प्रदान’ के सिद्धांत पर काम करेगी। इंडस्ट्री के कुछ जानकार मानते हैं कि सरकार का यह कदम कुछ विदेशी कंपनियों विशेषकर चीन को रणनीतिक सेक्टर से बाहर रखने के लिए है।

CEA चेयरमैन आर.के. वर्मा के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक़ अथॉरिटी देश के पावर सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए काम कर रही है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यह किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि उन सभी देशों के खिलाफ है जो हमारे सिस्टम को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।’

वर्मा ने CEA के नए नियमों के बारे में बताने से इनकार किया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों के लिए भारत में 10 साल तक रहने, भारतीय नागरिक को सर्वोच्च पदों पर रखने, कर्मचारियों के लिए निश्चित समय सीमा का निवास, जैसी शर्तें रखी जा सकती हैं। इसके अलावा कंपनियों से ट्रांसमिशन सिस्टम के इनपुट स्रोत का खुलासा करने को कहा जा सकता है और मालवेयर टेस्ट को अनिवार्य किया जा सकता है।

चाइनीज बिजली कंपनियां अभी यहां अच्छा कारोबार कर रही हैं, क्योंकि भारत में घरेलू विनिर्माण की क्षमता कम थी और चीन को बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने में आसानी हुई।

टेलिकॉम सेक्टर

इसी तरह केंद्र सरकार टेलिकॉम सेक्टर में भी सुरक्षा मानकों को ऊंचा कर रही है, जिसमें टेलिकॉम इक्विपमेंट और स्मार्टफोन्स बनाने वाली चाइनीज कंपनियों का दबदबा है। पिछले सप्ताह बिजली और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्मार्टफोन बनाने वाली 21 कंपनियों से सिक्यॉरिटी, आर्किटेक्चर फ्रेमवर्क, गाइडलाइन्स, स्टैंडर्ड आदि की जानकारी मांगी है। इन कंपनियों में अधिकतर चाइनीज हैं l Xiaomi, Lenovo, Oppo, Vivo और Gionee जैसे चाइनीज वेंडर्स का भारत के 10 अरब डॉलर के स्मार्टफोन बाजार के आधे से अधिक हिस्से पर कब्जा है।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार कहते हैं, ‘पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को समर्थन देकर हमारे अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने की वजह से चीन के खिलाफ काफी गुस्सा है। दूसरी तरफ वह हमारे व्यापार और उद्योगों को वह हर साल काफी नुकसान पहुंचा रहा है।’ संगठन ने लोगों से चीनी सामानों के बहिष्कार की अपील की है।

रास्ता हुआ बेहद कठिन

भारत ने बिजली उत्पादन और वितरण के लिए चाइनीज सामानों का इस्तेमाल किया है। ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने इस महीने संसद को बताया कि ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए बोली लगाने वाले कंपनियों में CLP इंडिया प्राइवेट लि. के साथ चाइना सदर्न पावर ग्रिड भी शामिल है।

इंडियन इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन के डायरेक्टर जनरल सुनील मिश्रा ने कहा, ‘पावर ट्रांसमिशन के नए नियमों से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। चीन भी अपने यहां विदेशी कंपनियों को सीमित पहुंच देता है।’


CEA ड्राफ्ट से जुड़े एक और व्यक्ति ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पावर सेक्टर में आ रहे चाइनीज इक्विपमेंट्स के लिए कई प्रोटोकॉल्स और जांच को लागू किया है। उन्होंने कहा, ‘यह ताजा घटनाक्रम है और सब शांति से हो रहा है।’

भारत में काफी नोट छाप लिए, अब इन सभी चीनी कंपनियों के धंधे बंद होंगे और वापस अपने देश लौटेंगे l स्थानीय भारतीय कंपनियां काफी लम्बे वक़्त से इस सेक्टर में चीन के बढ़ते दखल के खिलाफ यह कहते हुए आवाज उठाती रही हैं कि यह सुरक्षा के लिए खतरा है और बदले में उन्हें चीन के मार्केट में इस स्तर पर कारोबार करने की छूट नहीं है l

अब जबकि चीन ने शीत युद्ध की शुरुआत कर ही दी है, तो पीएम मोदी भी पूरी तरह से तैयार हैं l तुम हमारे भारतीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालोगे, तो हम भारत से तुम्हारी अरबों रुपयों का व्यापार करने वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाएँगे, जिससे एक-दो नहीं बल्कि लाखों चीनी नागरिकों की आजीविका का नुकसान तो होगा ही, साथ ही चीनी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद भी हो जायेगी l भारत ने ऐसा कठोर फ़ैसला लेकर मानो चीन को सीधी चुनौती दी है कि, आ जाओ, हम तैयार हैं l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *