Wednesday, January 17, 2018
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बड़ी ख़बर: चीन कर रहा युद्ध की तैयारी – कभी भी हो सकती है जंग – भारत तैयार – सेना प्रमुख विपिन रावत बोले…….

डोकलाम विवाद के सुलझने के बाद अब जो ख़बर आ रही है, वो बेहद चौंकाने वाली है l इस ख़बर के मुताबिक़ नए साल से ही चीन ने युद्ध की तैयारियां शुरू कर दी हैं और माना ये जा रहा है कि चीन का रुख अगर यही रहा तो भारत और चीन के बीच कभी भी जंग छिड़क सकती है l

इस बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक बड़ा बयान दिया है l बिपिन रावत ने कहा है कि भारत चीन से मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार है और चीन ने अगर युद्ध करने की गलती की तो भारत मुहंतोड़ जवाब देगा l

भले ही डोकलाम विवाद थम गया हो लेकिन पड़ोसी चीन को देखकर लगता है कि उसके रूख में अभी कोई बदलाव नहीं आया है। चीनी सेना ने इस बार अपने घर के साथ-साथ विदेश में भी युद्धाभ्यास किया है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग द्वारा 3 जनवरी को ट्रेनिंग के आदेश जारी होने के बाद चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपनी नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और पुलिस बले के साथ घर तथा विदेश में सैन्य अभ्यास किया।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा कल जारी किए गए आधिकारिक बयान में सैनिकों को तत्कालिक खतरों और आत्ममुग्धता से बचने की सलाह दी गई थी। चीनी नौसेना द्वारा हिंद महासागर के जिबूती बेस पर अभ्यास किया गया जिसे आधिकारिक रूप से एक लॉजेस्टिक बेस कहा जाता है।

चीन की 2.3 मिलियन आर्मी के मुखपत्र कहे जाने वाले पीएलए डेली ने  दावा किया है कि 2018 की शुरूआत के साथ ही चीन ने अपने सबसे उन्नत सैन्य लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया है जिनमें जे-20 लड़ाकू विमान, वाई -20 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एच-6के बॉम्बर तथा जे-16, जे-11बी, जे-10सी जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं।

जे -20 लड़ाकू विमान जे -16 सहित अन्य लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा है।  ये लड़ाकू विमान ऐसे जगहों पर अभ्यास कर रहे हैं जिनकी जानकारी किसी के पास नहीं है।

अखबार के मुताबिक़ यह अभ्यास इसलिए किया जा रहा है ताकि लंबे समय तक सेना की क्षमता में सुधार हो सके। जिस ‘पठारी क्षेत्र’ में यह अभ्यास किया गया वह तिब्बती पठार में स्थित है और यह भारत और चीन के बीच एक लंबी वास्तविक नियंत्रण (एलएसी) रेखा को कवर करता है।

चीनी वायु सेना के एक रिटायर्ट अधिकारी ने ग्लोबल टाइम्स से बात करते हुए बताया कि ‘सीमावर्ती क्षेत्रों के हालात भारतीय आर्मी के अनुकूल जरूर है लेकिन यदि विवाद होता है तो चीनी सेना को भारत पर हावी होने के लिए परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाना जरूरी होगा, तांकि तुरंत मुकाबला किया जा सके। इसलिए पठारी क्षेत्रों में सैन्य अभ्यास करना बेहद जरूरी है।’

इस बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि चीन ताकतवर देश होगा, लेकिन भारत भी कमजोर देश नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत किसी को भी अपने क्षेत्र में घुसपैठ की अनुमति नहीं देगा। आर्मी चीफ ने चीन की तरफ से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की रणनीति पर बात की।

रावत ने कहा कि ‘अब समय आ गया है कि भारत अपना ध्यान उत्तरी सीमा की ओर केंद्रित करे। देश इसके साथ ही चीन की आक्रामकता से निपटने में भी सक्षम है।’

सेना प्रमुख ने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के आक्रामक चीन के प्रयासों के बीच कहा कि भारत अपने पड़ोसियों को देश से दूर होकर चीन के करीब नहीं जाने दे सकता। डोकलाम मुद्दे पर रावत ने कहा, ‘हम सीमा पर होनेवाली गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हलचल हुई तो हम तैयार हैं।’

सेना प्रमुख ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘चीन एक शक्तिशाली देश है, लेकिन हम कमजोर देश नहीं हैं।’ भारत में चीनी घुसपैठ से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘हम किसी को भी हमारे क्षेत्र में घुसपैठ की अनुमति नहीं देंगे।’

रावत ने आतंकवाद से निपटने को लेकर पाकिस्तान को दी गई अमेरिका की चेतावनियों के बारे में कहा कि भारत को इंतजार करना होगा और इसका असर देखना होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी केवल इस्तेमाल करके फेंकने की चीज हैं। भारतीय सेना का नजरिया यह सुनिश्चित करना रहा है कि उसे दर्द का एहसास हो।

आपको बता दें कि सिक्किम, चीन और भूटान सीमा पर स्थित डोकलाम पठार पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अतिक्रमण के बाद 16 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध पैदा हो गया था। चीन ने इस इलाके में सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था। उसने भूटान के इस इलाके पर अपना दावा जताया था।

इस पर भारतीय सेना ने आपत्ति जताई थी। चीन के निर्माण रोकने के बाद दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से यह गतिरोध 28 अगस्त को समाप्त हुआ था। जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक भारत की चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक सीमा रेखा लगती है l

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