Friday, December 15, 2017
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अचानक आने वाले हार्ट अटैक से अब नहीं होगी मौत – ये अनौखा फार्मूला करेगा काम – 6 घंटे पहले ही लग जाएगी ख़बर

आपके आसपास कई ऐसे वाकये हुए होंगे जिनमें आपके अपने या आपसे दूर रहने वाले व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो गयी होगी l इस मृत्यु की वज़ह भी जब आपने सुनी होगी तो आप हैरान रह गए होंगे l साइलेंट हार्ट अटैक l अचानक से किसी अच्छे खासे व्यक्ति को हार्ट अटैक हुआ और उसकी मौत हो गयी l कई केसों में तो ऐसा उनके साथ भी हुआ, जिन्हें मृत्यु से पहले हार्ट सम्बन्धी कोई बीमारी ही नहीं थी l

अक्सर ऐसे वाक्यों में इंसान खुद को बड़ा असहज महसूस करता है, क्योंकि जब तक उसे हार्ट अटैक का पता चल पाता है, तब तक उसका अपना इस दुनिया से अलविदा कह चुका होता है l ऐसे में ज़ेहन में बस यही आता है कि काश कुछ वक़्त पहले पता लग जाता तो समय से अस्पताल ले जाते, उचित इलाज़ मुहैया करवा पाते l

अब ऐसा नहीं होगा l जी हाँ अब अचानक गाँव देहात में किसी को भी हार्ट अटैक आने से उसकी मौत की सम्भावना बहुत कम हो जाएगी l दरअसल तमिलनाडु के एक दसवीं के छात्र ने ऐसी डिवाइस बनाई है, जिससे छह घंटे पहले ही हार्ट अटैक का पता लगाया जा सकता है l छात्र मनोज को इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया है और मनोज राष्ट्रपति भवन में बतौर अतिथि भी जा चुके हैं l

तमिलनाडु निवासी 16 साल के मनोज द्वारा इजाद की गई इस जादुई डिवाइस को विज्ञान की दुनिया का चमत्कार माना जा रहा है l इस डिवाइस के जरिए साइलेंट हार्ट अटैक को काफी हद तक रोका जा सकता है l ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह डिवाइस काफी कारगर साबित हो सकती है l

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक मनोज का कहना है कि आज कल साइलेंट हार्ट अटैक आम हो गया है और दबे पांव आने वाली इस मौत से इंसान अंजान रहता है l इसका कोई लक्षण भी नहीं दिखता l ऊपरी तौर पर व्यक्ति स्वस्थ दिखता है, इसलिए इससे बचने की कोई गुंजाइश नहीं बच पाती l

मनोज ने बताया कि उसके दादा की भी साइलेंट हार्ट अटैक की वजह से मृत्यु हो गई थी और उसके बाद ही मनोज ने ऐसी डिवाइस बनाने की ठानी जिससे इसका समय रहते पता लगाया जा सके l

उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित की, जिससे बिना स्किन में कट लगाए ब्लड बायोमार्कर FABP3 का पता लगाया जा सकता है, जिसके कारण अटैक की आशंका बनी रहती है l आपको बता दें कि मनोज बड़े होकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं l

निश्चित तौर पर मनोज की ये खोज उन इलाकों में बेहद कारगर साबित होगी जहाँ उचित इलाज़ मिलने में वक़्त लग जाता है और हार्ट अटैक का पता चलने तक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है l

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