Wednesday, January 17, 2018
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बेहद गंभीर: पकड़े गए महाराष्ट्र दंगों के मास्टरमाइंड – नाम और कारनामे जानकर दंग रह जायेंगे आप

पुणे से शुरू हुई जातिगत हिंसा पूरे महाराष्ट्र और फिर गुजरात तक चली गयी l कुछ ख़बरें मध्य प्रदेश से भी आयीं कि कुछ बसें वहां भी फूंक दी गयीं l जातिगत हिंसा के नाम पर पूरे महाराष्ट्र को जला दिया गया और जिसे चाहा जमकर मारा गया, सरकारी बसों, ट्रेनों, मेट्रो और सरकारी दफ्तरों तक को निशाना बनाया गया l

ये सही है कि महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार वक़्त रहते इस हंगामे को रोकने में न सिर्फ नाकाम रही बल्कि आग फैलने के कई घंटों बाद भी वो हिंसा पर काबू नहीं कर पाए l सवाल ये है कि जब ये कार्यक्रम पिछले 199 सालों से हो रहा था, तो आख़िर इसमें इस बार ही हिंसा क्यों हुई ? इस बार ही दलित समाज के लोग क्यों भड़के ? इस बार ही मराठा समाज के लोगों ने इस आन्दोलन का विरोध क्यों किया ?

ये समारोह हर साल होता था, और बेहद शांतिप्रिय तरीके से दलित समाज के लोग वीर महार योद्धाओं को नमन करके चले जाते थे तो इस बार ऐसा क्या हुआ कि ये कार्यक्रम हिंसा का उद्देश्य बन गया l

यह पूरा विवाद 1 जनवरी 1818 के दिन हुए उस युद्ध को लेकर है, जो अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच कोरेगांव भीमा में लड़ा गया था। इस युद्ध में अंग्रेजों ने पेशवा को शिकस्त दे दी थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में बड़ी संख्या में दलित भी शामिल थे।

उस युद्ध में अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए ही दलित समुदाय की तरफ से पुणे में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिस पर बवाल हो गया। दलित और मराठा समुदाय के लोग सड़क पर आमने-सामने आ गए। इसी कार्यक्रम में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद ने भाषण दिया था।

दरअसल इस बार ये कार्यक्रम और महाराष्ट्र में फैलने वाली ये हिंसा प्रायोजित मानी जा रही है l जिस तरह से इस बार इस कार्यक्रम में जेएनयू के स्टूडेंट से कथित नेता बने उमर खालिद, इस बार गुजरात चुनाव जीते दलित नेता जिग्नेश मेवानी और हैदराबाद में आत्महत्या करने वाले छात्र रोहित वेमुला की बहन को बुलाया गया, उससे ये साबित होता है कि इस बार इस कार्यक्रम को सियासत की भेंट चढ़ाया जाना सुनियोजित था l

ख़बर है कि कार्यक्रम के दौरान जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने भड़काऊ भाषण दिए और जिसके बाद हिंसा भड़क गयी l हांलाकि अभी महाराष्ट्र पुलिस सारे मामले की जांच कर रही है और जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया गया है l इसके अलावा दोनों के मुंबई में होने वाले कार्यक्रम पर भी रोक लगा दी गयी है l

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा का मुद्दा लगातार गर्माया हुआ है। महाराष्ट्र और गुजरात से लेकर राजधानी दिल्ली तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है। इस बीच महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में गुजरात के दलित विधायक जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दोनों पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया है। पुणे के विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153 ए, 505 और 117 के तहत यह केस दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस के PRO ने कहा है कि कई इलाकों से 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

इस बीच पुलिस ने मुंबई में होने वाले जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद के कार्यक्रम को भी अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मुंबई पुलिस ने इसके लिए कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का हवाला दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जिग्नेश समर्थकों ने प्रदर्शन और नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस ने कई कार्यकताओं हिरासत में ले लिया।

आपको बता दें कि जिग्नेश मेवाणी ने 31 दिसंबर को भीमा-कोरेगांव में दिए अपने भाषण में भी पीएम मोदी पर तीखे हमले किए थे। जिग्नेश ने कहा था, ‘गुजरात के बाद पूरे देश में हम 56 इंच के सीने को फाड़कर रख देंगे। इस देश के प्रधानमंत्री जब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब उन्होंने ‘कर्मयोगी’ किताब लिखी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि सफाईकर्मियों को सफाई करने में आध्यात्मिकता का आनंद मिलता है। यही नव पेशवाई है।

मैं प्रधानमंत्री जी को आह्वान करता हूं कि वह यहां आएं और दलितों के साथ एक दिन गटर में उतरें और नव पेशवाई का आनंद लें। इससे उन्हें पता चलेगा कि नव पेशवाई क्या है।’

इसके अलावा कार्यक्रम में आये उमर खालिद ने भी मंच से भाषण दिया और कार्यक्रम में आई भीड़ को भड़काने का काम किया l ये वही उमर खालिद हैं जिनका नाम दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी के कैम्पस में “भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह, इंशाल्लाह” जैसे नारे लगाने में शामिल था l उस वक़्त सामने आये वीडियो में ये साफ़ जाहिर हो रहा था कि कैसे उमर खालिद भारत की बर्बादी और भारत के टुकड़े करने के सपोर्ट में नारे लगा रहा था l

अब सोशल मीडिया के मुताबिक़ यही उमर खालिद महाराष्ट्र पहुँच गए और इस बार निशाना कश्मीरी नहीं बल्कि दलित बन गए l सोशल मीडिया पर उमर खालिद को लेकर बेहद गुस्सा है और कहना यही है कि वक़्त और जगह के हिसाब से जातियां बदल जाएँगी लेकिन मकसद एक ही रहेगा “भारत को तोड़ना और हिन्दुओं को बांटना l”

लिहाज़ा हमारी सभी हिन्दू भाई बहनों से ये अपील है कि भीड़ और अफवाह के शिकार न बनें l देश तोड़ने वालों की बातों में बिलकुल न आयें l पीएम मोदी को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए ये चालें लगातार चली जा रही हैं और इनका मकसद सिर्फ यही है कि किसी भी तरह से भारत के प्रधानमंत्री को बदला जाए l किसी भी तरह से देश की सत्ता से बीजेपी को बेदखल किया जाए l इसके लिए अब कुछ सत्तालोलुपियों ने देश में “हिन्दुओं को बांटो और राजनीति करो” वाला फार्मूला इस्तेमाल शुरू कर दिया है l

आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब कांग्रेस दफ़्तर से महाराष्ट्र के लोगों से शांत रहने की अपील करने की बजाय, हिंसा को और भड़काने की कोशिश की गयी l कांग्रेस के नए अध्यक्ष बने राहुल गाँधी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि भारत के लिए RSS और बीजेपी का फासीवादी दृष्टिकोण ही यही है कि दलितों को भारतीय समाज में निम्न स्तर पर ही बने रहना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा था कि  ‘उना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक हैं।’ दरअसल, यह पूरा विवाद 1 जनवरी 1818 के दिन हुए उस युद्ध को लेकर है, जो अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच कोरेगांव भीमा में लड़ा गया था।

राहुल गाँधी के इस ट्वीट में हैं भी ये शामिल नहीं था कि हिंसा करने वालों को शांति रखनी चाहिए और सभी वर्गों को शांत रहना चाहिए l गुरुवार को इसी मसले पर सीपीएम् नेता सीताराम येचुरी का भी एक ट्वीट आया और वो तो राहुल गाँधी से भी एक कदम आगे निकल गए l ज़नाब ने ट्वीट में लिखा कि ” बीजेपी सरकार दलितों को भारत का नागरिक मानती है या नहीं ? क्या बीजेपी के हिसाब से दलित भारत के नागरिक नहीं”

इन नेताओं को ये क्यों नही समझ आता कि जब दुनिया आगे बढ़ रही है तो ये भारत को जातियों में क्यों बांटने में लगे हैं l पहले आरक्षण और अब अपने अपने वोट बैंक के हिसाब से जातिगत सियासत l क्या ये भारत को पीछे धक्लना नहीं है ? क्या ये देशद्रोह नहीं है ? हिन्दुओं को बांटना और देश की सत्ता से बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी को हटाना ही इनका एकमात्र लक्ष्य है और पहले गुजरात और अब महाराष्ट्र देखकर यही लगता है कि ये निम्न स्तर की राजनीति पर उतर आये हैं l

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वालों के साथ आख़िर क्या होना चाहिए ? ये सही है कि अगर उमर खालिद को के कान खींचकर उस वक़्त ही सही कर दिया जाता तो शायद आज महाराष्ट्र नहीं जलता l न लोग मरते और न ही सरकारी संपत्ति को नुकसान होता l ये नुकसान तो हो सकता है भर भी जाए लेकिन नफ़रत की राजनीति की जो दुकान इन तथाकथित टुच्चे नेताओं और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने शुरू कर रखी है, उसका नुकसान कैसे भरा जाएगा ?

आने वाली नस्लें भी इस नफ़रत का शिकार होंगी और भारत आगे बढ़ने की बजाय पीछे हो होता रहेगा l इस ख़बर को शेयर करें और हर हिन्दू तक पहुँचायें, फिर चाहे वो किसी भी जाति का क्यों न हो l हिन्दुओं को आपस में बांटना देश के कुछ नेताओं और कुछ टुच्चे लोगों का एकमात्र मकसद बन गया है और ऐसा न हो इसके लिए हर हिन्दू को वक़्त रहते सतर्क रहना होगा l  लिहाज़ा जरा संभलकर, जरा सोचकर, जरा समझकर l

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