Wednesday, January 17, 2018
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कंपनियों और फैक्ट्रियों में काम करने वालों को मोदी सरकार का सबसे शानदार तोहफ़ा – देश भर में मची खलबली

पीएम मोदी ने अब एक और धमाकेदार फ़ैसला लिया है, जिसे नोटबंदी और GST के बाद एक बड़ा फ़ैसला माना जा रहा है l माना जा रहा है कि पीएम मोदी के इस फ़ैसले से देश के क़रीब 4 करोड़ लोगों को फायदा होगा l

आपको बता दें कि फिलहाल देश में एक ही सेक्टर में काम करने वाले लोगों की तनख्वाह एक-दूसरे से कम या ज्यादा होती है लेकिन मोदी सरकार अब इसमें एक बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है l मोदी सरकार के मुताबिक़ एक ही सेक्टर में काम करने वाले लोगों की तनख्वाह भी एक सामान ही होनी चाहिए, ताकि सभी को समान रूप से फायदा मिल सके l ऐसे में मोदी सरकार एक ऐसा बिल लेकर आयी है, जिससे पूरे देश में एक वेतन का सपना पूरा होने जा रहा है l

बुधवार को मोदी सरकार ने “वेज बिल” को अपनी मंजूरी दे दी है l कैबिनेट द्वारा इस बिल को मंजूरी मिल जाने के बाद अब संसद में इसे पेश किया जाएगा और संसद में मंजूरी मिलते ही “वेज कानून” बन जाएगा l इस नए क़ानून के बनने से फिलहाल देश में चल रहे मिनिमम वेजेस एक्ट 1948, पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट 1936, पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 और समान पारितोषिक एक्ट 1976 को सरकार ख़त्म कर देगी l

इतना ही नहीं, मोदी सरकार देश में अभी चल रहे 44 अन्य लेबर एक्ट को भी खत्म कर देगी l नए एक्ट के पारित होने के बाद ये एक एक्ट ही काफी रहेगा और इसके आने से ना केवल व्यापारियों के लिए व्यापार करना आसान हो जाएगा बल्कि लोगों को भी ज्यादा वेतन मिलने लगेगा l इतना ही नहीं हर दो साल में वेतन की दरों में परिवर्तन भी किया जा सकेगा और किसी का शोषण भी नहीं किया जा सकेगा l

ख़बर है कि अगले महीने से शुरू होने वाले मानसून सत्र में श्रम मंत्रालय ‘वेज बिल’ को सदन के सामने पेश करेगा और इस बिल के तहत सभी मजदूरों, कामगारों, फैक्ट्रियों व् कंपनियों में काम करने वाले लोगों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा l

इस बिल की सबसे ख़ास बात ये है कि इस बिल में 18 हजार से ज्यादा की मासिक तनख्वाह वाले लोगों को भी शामिल किया जाएगा, जो अबतक वेज बिल से बाहर थे l

आपको बता दें कि न्यूनतम वेतन कोड बिल के तहत तय न्यूनतम वेतन देना कानूनी तौर पर जरूरी हो गया है और सभी कंपनियों को अनिवार्य तौर पर न्यूनतम वेतन देना होगा l न्यूनतम वेतन कितना रखा जाना चाहिए, इसका फैसला केंद्र सरकार करेगी l नए बिल के तहत राज्य, केंद्र द्वारा तय किया गए न्यूनतम वेतन को और कम नहीं कर सकते और तय न्यूनतम वेतन सभी तरह की कंपनियों पर लागू होगा l

 

गौरतलब है कि फिलहाल 51 तरह के रोजगार पर ही न्यूनतम वेतन कानून लागू है जबकि अन्य जगहों पर मालिक जितना मर्जी आये उतना वेतन देते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा l श्रम मंत्रालय के सेक्रेटरी एम सत्यवती ने बताया कि मंत्रालय सदन के मानसून सत्र में मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के हितों का ख़याल रखने वाले इस बिल को पेश करेगा l वित्तमंत्री अरुण जेटली पहले ही इस बिल को हरी झंडी दे चुके हैं l

इसके पास होते ही पूरे देश में वेतन की दर एक हो जाएगी l अभी कई राज्यों में वेतन दर एक समान नहीं है और किसी-किसी राज्य में तो वेतन इतना कम दिया जाता है कि लोगों का गुजारा करना तक कठिन हो जाता है l ऐसे में केंद्र सरकार वेतन की जो दर तय करेगी, उसके बाद राज्य सरकारों को कम से कम उतना पैसा तो कामगारों के लिए फिक्स करना ही होगा l

काबिलेगौर है कि इससे पहले जीएसटी के द्वारा भी एक देश एक टैक्स को लागू किया गया था, जिसके जरिये व्यापार को आसान व् टैक्स चोरी को मुश्किल कर दिया गया l अब इस वेज बिल के आते ही कंपनियों में काम करने वाले सभी लोगों को कम वेतन की मुश्किल से निजात मिल सकेगी l

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