Tuesday, January 16, 2018
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बकरीद से ठीक पहले इस मुस्लिम संगठन ने किया ये ज़बरदस्त ऐलान – ओवैसी और आज़म के उड़े होश

2 सितम्बर को देश भर में बकरीद मनाई जाएगी और इस मौके से पहले एक मुस्लिम संगठन ने ऐसा ऐलान किया है जो वाकई बेहद चौंकाने वाला है l इस ऐलान ने कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं के होश उड़ा दिए हैं l कट्टरपन्थी नेताओं को समझ नहीं आ रहा कि वो आख़िर करें तो क्या करें l

आपको बता दें कि अभी हाल ही में यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऊंट के बिना वज़ह कत्लेआम को रोकने का फ़ैसला लिया था, तो वहीँ अब आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  की मुस्लिम राष्ट्रीय मंच समिति ने बकरीद से पहले बड़ा एलान किया है l इस ऐलान के बाद अब कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं की भौंहें तन गयी हैं l

दरअसल बकरीद पर कुर्बानी के नाम पर मासूम बेज़ुबान जानवरों की हत्या के विरोध में अब खुद एक मुस्लिम समाज खड़ा हो गया है l मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्यों ने बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी का कड़ा विरोध जताया है l

इस संगठन के संयोजक खुर्शीद आगा ने कहा है कि “तीन तलाक की तरह, बकरीद में कुर्बानी को लेकर समाज में अंधविश्वास फैला है, ये भी एक कुप्रथा है l मुसलमान अपने आपको ईमान वाला तो कहता है, लेकिन वास्तव में अल्लाह की राह पर चलने से भटक गया है” l

खुर्शीद आगा ने कुर्बानी का विरोध करते हुए कहा कि हिंदुस्तान से अब कुप्रथाएं समाप्त होनी चाहिए l हम सभी 21वी सदी में प्रवेश कर चुके हैं l कुर्बानी का कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने प्रश्न उठाया कि कुर्बानी जायज नहीं है तो फिर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है?

इसके अलावा संघ के राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के यूपी और उत्तराखंड के संयोजकों ने मुसलमानों से अपील की है कि वे बकरीद पर बेजुबान जानवरों का कत्ल न करें, बल्कि सांकेतिक तौर पर बकरीद मनाएं l

खुर्शीद आगा का कहना है कि जिस कुर्बानी का हवाला देकर बकरीद में जानवरों को काटा जाता है वो कभी हुआ ही नहीं l ये कुर्बानी तो रहमत का त्यौहार है, जहां कुर्बानी के बाद भी जिंदगी मिली है l खुद रसूल ने जब अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने उसे जिंदगी बख्शी l इसी प्रकार बकरीद के दिन बेजुबान पशुओं का बेहिसाब कत्ल कहीं से जायज नहीं है l

इसके बाद ही उन्होंने अयोध्या विवाद को लेकर कहा कि “कुरान के अनुसार, जहां फसाद हो वहां नमाज अदा नहीं की जा सकती है तो फिर अयोध्या में विवादित ढांचे की जगह मस्जिद कैसे बनाई जा सकती है.”l

वहीँ यूपी के ठाकुर राजा रईस ने कहा “जब हजरत इब्राहिम द्वारा किसी जानवर की कुर्बानी नहीं दी गई तो फिर मुस्लिम समाज में बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जा रही है l बकरीद में जानवरों की कुर्बानी के नाम पर जानवरों का बेरहमी से कत्ल हो रहा है, यह कुर्बानी नहीं हत्या है.” l उन्होंने कहा, “रसूल ने फरमाया है, “पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अल्लाह की रहमत है, उन पर तुम रहम करोगे, अल्लाह की तुम पर रहमत बरसेगी.”l

संयोजक (अवध प्रांत) सैयद हसन कौसर ने इसके बाद ही गाय या गाय के वंश की क़ुरबानी को हराम बताते हुए कहा है “तीन तलाक’ की तरह ही बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी भी एक कुरीति है और अब वक़्त आ गया है कि समाज से सब कुरीतियां हमेशा के लिए ख़त्म होनी चाहिए l

आरएसएस के मुस्लिम मंच के इस ऐलान ने कट्टरपंथी नेताओं की नींद उड़ा दी है और कुछ मुस्लिम धर्मगुरु इस ऐलान से खफा हैं और उनका मानना है कि आरएसएस के मुस्लिम मंच का ये ऐलान गलत है l

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