Wednesday, January 17, 2018
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बड़ी ख़बर: यहाँ बना ऐतिहासिक क़ानून – माँ बाप की सेवा करना ज़रूरी – नहीं की, तो कटेगी सैलरी

माँ बाप की सेवा के लिये अब इस राज्य ने एक ऐतिहासिक क़ानून बनाया है और इसके मुताबिक़ अगर आपने अपने माँ बाप की सेवा नहीं की तो आपकी सैलरी काट ली जाएगी l कहते हैं कि माँ बाप की सेवा करना इंसान का सबसे बड़ा धर्म है और माँ बाप की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं l शास्त्रों में भगवान की पूजा से भी बढ़कर माँ बाप की सेवा को माना गया है लेकिन आज के परिवेश में जिस तरह से लोग अपने माँ बाप को छोड़ रहे हैं और भारत में वृद्धाश्रम का कल्चर बढ़ता जा रहा है वो वाकई चिंता का विषय है l

हाल ही में मुंबई से एक ख़बर आई कि एक बीटा अपनी अकेली माँ को मुंबई में छोड़कर खुद विदेश में शिफ्ट हो गया और सालों से वहीँ रह रहा है l माँ की तबियत ख़राब रहती थी और उनका निधन हो गया लेकिन बेटे और दुनिया को ये बात तब पता चल पायी जब उनका शरीर कंकाल बन चुका था l

अब ऐसे में यही कह सकते हैं कि आजकल भारत में माँ बाप को छोड़कर अकेले बसने का कल्चर बढ़ता जा रहा है और ये भारतीय समाज के लिए बेहद दुखद कहा जा सकता है l ऐसे में भारत के एक राज्य ने एक ऐतिहासिक क़ानून बनाया है l हांलाकि इस क़ानून को बनने में थोड़ा समय लगेगा लेकिन इस दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं और विधानसभा में इससे सम्बंधित बिल को पास भी करा लिया गया है l

असम में बीजेपी  सर्वानंद सोनोवाल सरकार ने ऐतिहासिक कानून बनाया है जिसके तहत बुजुर्ग मां-बाप की जिम्मेदारी उठाने से भागने  वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से पैसे काटे जाएंगे। 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा ने शुक्रवार को इस ऐतिहासिक बिल को पास किया। आपको बता दें कि पहली बार किसी सरकार ने बुजुर्गों के हितों के लिए इस तरह का कानून बनाया है।

राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो गया जाएगा l  असम एम्पलॉयीज पैरंट्स रेस्पॉन्सिबिलिटी ऐंड नॉर्म्स फॉर अकाउंटैबिलिटी ऐंड मॉनिटरिंग बिल-2017 नाम के इस कानून को असम एम्पलॉयीज प्रणाम बिल के नाम से जाना जायेगा l

कानून के मुताबिक अगर राज्य सरकार का कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने से भागता है तो सरकार उसकी सैलरी का 10 प्रतिशत हिस्सा काट लेगी और उसे मां-बाप के खाते में ट्रांसफर कर देगी। अगर कर्मचारी का कोई भाई या बहन दिव्यांग है तो उसकी सैलरी से 5 प्रतिशत अतिरिक्त कटौती होगी।

असम एम्पलॉयीज प्रणाम बिल पर विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार को यह मंजूर नहीं कि कोई भी शख्स अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड एज होम में छोड़कर जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का कानून बनाने वाला असम देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इस कानून के दायरे में लाया जाएगा l

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