Tuesday, January 16, 2018
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रोहिंग्या मुस्लिमों से लड़ते बौद्धों को मिला पीएम मोदी का साथ – लिया ये बड़ा फ़ैसला

अभी कुछ ही घंटों पहले आई एक ख़बर ने ये साबित कर दिया था कि देश में बैठे देश के ही कुछ लोग किस तरह से मोदी विरोध में वो सब करने में लगे हैं जो शायद उन्हें नहीं करना चाहिए l प्रशांत भूषण का नाम तो आपने सुना ही होगा, जी हाँ वही प्रशांत भूषण जिन्होंने याकूब मेमन को फांसी होने के बाद उस आतंकी की फांसी को रोकने के लिए देर रात में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा तक खटखटा दिया था l हांलाकि इसका कोई फायदा नहीं हुआ और आतंकी याकूब मेमन को फांसी हुई l

अब यही प्रशांत भूषण साहब देश के रोहिंग्या मुसलमानों का केस लड़ रहे हैं l एक तरफ देश की मोदी सरकार देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर करने की क़वायद में जुटी है तो दूसरी तरफ प्रशांत भूषण साहब ने देश की इस सरकार के फ़ैसले के विरोध में रोहिंग्या मुस्लिमों के केस को अपने हाथ में ले लिया है l

आपको बता दें कि शुक्रवार को देश की सर्वोच्य अदालत में म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा पहुंचा। वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर भारत आने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को जबरदस्ती म्यांमार भेजे जाने का विरोध किया। प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार ने करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमानों को जबरदस्ती म्यांमार भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि अगर रोहिंग्या मुसलमानों को जबरदस्ती पड़ोसी देश म्यांमार भेजा गया, तो यह एक तरह से उन्हें काल के मुंह में डालना जैसा होगा। उनके मुताबिक वापस भेजे जाने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को स्थानीय सेना के हाथों उनकी मौत दी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ मामलें में सुनवाई के लिए राजी हुयी। रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर अगली कोर्ट 4 सितंबर को सुनवाई करेगी।

म्यांमार के हालात से इस वक़्त शायद कम ही लोग परिचित हैं l वो बौद्ध जो कभी दुनिया में शांति के प्रतीक और शांति का पाठ पढ़ाने वाले होते थे, आज वही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं l अपने ही देश में बहुसंख्यक होने के बाद भी बौद्धों को अपने हक़ के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है l इसे ठीक वैसे ही समझ सकते हैं जैसे कि कुछ सालों पहले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को लड़नी पड़ी थी l उस वक़्त कश्मीरी पंडितों को उन्ही के बसाये कश्मीर से खदेड़ दिया गया और ताज्ज़ुब इस बात का कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार इस पर मूकदर्शक बनी रही l

वैसा ही कुछ अब म्यांमार में हो रहा है लेकिन वहां बौद्धों ने ये साबित कर दिया कि अगर वो शांति के पथ पर चलना जानते हैं तो अपने हक को बचाने के लिए लड़ना भी बखूबी जानते हैं l म्यांमार के हालात इस वक़्त बेहद ख़राब हैं और अब बौद्धों ने वहां से रोहिंग्या मुस्लिमों को खदेड़ना शुरू कर दिया है l

आपको बता दें कि म्यांमार में छिपे रोहिंग्या आतंकियों को खोज कर समाप्त करने के आदेश देने के बाद म्यांमार अचानक ही विश्व पटल पर आ गया है l म्यांमार के ख़िलाफ़ ईसाइयों की सर्वोच्च सत्ता माने जाने वाले पोप खुल कर आ गए और उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए दर्द जता कर ईसाइयों को परोक्ष संदेश दिया कि वो म्यांमार के ख़िलाफ़ ही रहें l हांलाकि म्यांमार को इस से फ़र्क नहीं पड़ा और अविचलित बौद्ध बिना किसी की परवाह के अपने राष्ट्र रक्षा के अभियान पर चलते रहे और अपने देश में छिपे आतंकियों का सफाया करते रहे l

अब बौद्धों के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर बने इस विपरीत हालात में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार की दो दिवसीय यात्रा करने का फ़ैसला किया है l ये माना जा रहा है कि म्यांमार जाकर नरेन्द्र मोदी ये साफ़ सन्देश देना चाहते हैं कि भारत हमेशा से आतंकवाद के ख़िलाफ़ था और रहेगा l

अगले हफ्ते होने वाली इस यात्रा से म्यांमार को अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्यवाही को सही ठहराने का एक बड़ा और मजबूत स्तम्भ मिल रहा है l अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी म्यांमार की यात्रा की थी और अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने म्यांमार की काफी तारीफ भी की थी  l

योगी आदित्यनाथ के बाद अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा अंतराष्ट्रीय जगत को ये साफ़ संदेश देने वाली है की वो जंग की इस घड़ी में म्यांमार के बौद्धों के साथ हैं l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी म्यांमार के राष्ट्रपति यू हिटन क्याव के आमंत्रण पर 5 से 7 सितंबर तक म्यांमार की यात्रा पर रहेंगे। जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत बेहद अहम साबित होगी। खासतौर से यह देखते हुए कि पिछले कुछ वर्षों में चीन ने म्यांमार में अपना प्रभाव बढ़ाया है।

बीते दो वर्षों में भारत ने चीन के असर को कम करने में अहम सफलता पाई है। पिछले महीने म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल यू मिन अंग ह्लियांग भारत यात्रा पर आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना प्रमुख से मुलाकात के बाद म्यामांर को भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया था। सेना प्रमुख से सैन्य सहयोग पर भी बातचीत हुई थी।

दोनों देशों के रिश्तों के लिए अच्छी बात यह है कि म्यांमार की नई सरकार का रवैया भारत के प्रति बेहद सकारात्मक रहा है। वैसे पीएम मोदी की इस यात्रा से नागालैंड ,मणिपुर के जो विद्रोही वहां शरण लेकर राहत पा रहे थे उनके ठिकानों को बंद करने में भी सहायता मिलेगी और पूर्वोत्तर भारत शांति और विकास के पथ पर अग्रसर हो सकेगा  l

वैसे यहाँ आपको ये भी बता दें कि म्यांमार की चीन से नजदीकी किसी से छिपी नहीं है और ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा से चीन का विचलित होना तय है l उधर म्यांमार सरकार भी पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर बेहद उत्साहित है l

गौरतलब है कि देश की मोदी सरकार भारत से अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को तुरंत निकालने के पक्ष में है l केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नौ अगस्त को संसद में कहा था कि यूएनएचसीआर में पंजीकृत 14 हजार से अधिक रोहिंग्या भारत में रह रहे हैं l उन्होंने कहा था कि लगभग 40 हजार रोहिंग्या भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं l

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को भेजे पत्र में कहा था कि पिछले कुछ दशकों में आतंकवाद में बढ़ोतरी लगभग सभी देशों के लिए एक गंभीर चिंता बन गयी है क्योंकि अवैध आव्रजकों को आतंकी संगठनों द्वारा भर्ती किए जाने की संभावना है l केंद्र ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन करें।

अब  ऐसे में म्यांमार की यात्रा से ये साफ़ हो जायेगा कि देश में से अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को निकालने के लिए मोदी सरकार कार्यवाही और तेज करेगी l हांलाकि अभी ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट के अधीन चला गया है l

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