Friday, December 15, 2017
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सऊदी अरब भी आया भारत की शरण में, उठाया ऐसा कदम, कट्टरपंथियों समेत ओवैसी, आजम भी सन्न

तेजी से बदलते हुआ भारत तेजी से विकास की ओर जा रहा है. समाज में भी सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं. मगर देश का एक ख़ास तबका है, जो अपनी घिसीपिटी और दकियानूसी विचारधारा को छोड़ना ही नहीं चाहता. भारत में मुसलमान भले योग का विरोध कर रहे हों, लेकिन अब सऊदी अरब से ऐसी जबरदस्त खबर सामने आ रही है, जिसने भारत के कट्टरपंथी मुसलमानों के होश उड़ा कर रख दिए हैं.

दुनिया भर में अपनी खूबियों का लोहा मनवा चुके योग का सऊदी अरब भी कायल हो गया है. सऊदी अरब के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय ने योग को खेल गतिविधियों के रूप में मान्यता दे दी है. यानी अब सऊदी अरब में यदि कोई योग सिखाना या इसे बढ़ावा देना चाहे, तो लाइसेंस लेकर अपना काम शुरू कर सकता है.

सऊदी अरब में योग को मिले इस दर्जे के पीछे नउफ मरवई को श्रेय दिया जा रहा है. वह सऊदी अरब की पहली महिला योग प्रशिक्षक हैं. अरबी योगाचार्य के रूप में मशहूर नउफ ने वर्ष 2010 अरब योग फाउंडेशन की स्थापना की थी. उन्होंने जेद्दा में रियाद-चाइनीज मेडिकल सेंटर खोल रखा है, जहां आयुर्वेद और योग जैसे गैर-पारंपरिक तरीकों से मरीजों का उपचार करती हैं. उनका मानना है कि योग का धर्म से कोई लेना देना नहीं.

भारत जिसे योग की जन्मभूमि कहा जाता है, वहीँ के काटरपंथी मुसलमान योग से नफरत करते हैं. योग को लेकर देश के कई मुस्लिम धर्मगुरु विरोध विरोध में खड़े हैं. हाल ही में झारखंड के रांची में योग सिखाने वाली रफिया नाज नाम की एक मुस्लिम महिला के खिलाफ तो एक मौलाना ने फतवा ही जारी कर दिया था, जिसके बाद कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उसे धिक्कारते हुए उसके घर पर पथराव कर दिया था.

वहीं इस्लाम को लेकर कट्टरपंथी रुख के लिए जाने जाने वाला सऊदी अरब इन दिनों बड़े बदलाव से गुजर रहा है. बता दें के इससे पहले 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भी सऊदी अरब के विभिन्न भारतीय स्कूलों में योग सत्र का आयोजन किया गया था.

कुछ ही दिन पहले सऊदी के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज के बेटे और क्राउंस प्रिंस (वली अहद) मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब को ‘उदारवादी इस्लाम’ की तरफ ले जाने का वादा किया था. इसी सिलसिले में वहां महिलाओं के कार चलाने पर प्रतिबंध भी हटा लिया गया.

यानी देखा जाए तो जिस सऊदी अरब को मुसलमान सबसे ज्यादा मानते हैं. अब वही सऊदी अरब तो योग को अच्छा मानते हुए अपना रहा है और भारत के मुस्लिम योग के विरोध में खड़े हैं. वैसे सऊदी के सामने अब कोई ख़ास चारा भी नहीं है, तेल का खेल ख़त्म हो रहा है और पैसा आना भी कम होता जा रहा है. लिहाजा अब कमाई के लिए अन्य देशों व् अन्य सम्प्रदायों पर निर्भर तो होना ही पडेगा. ऐसे में उन्हें काफिर या अछूत मानकर तो कमाई हो नहीं सकती.

लिहाजा सऊदी अरब अब उदारवाद की ओर कदम बढ़ा रहा है. योग को अपनाकर उसने साबित कर दिया है कि वो मजहबी कट्टरता को त्यागने के लिए तैयार है. सवाल ये है कि क्या भारत के मुसलमान भी अब सऊदी की देखा-देखी आगे बढ़कर उदारवाद को अपनाएंगे या अभी भी मजहबी कट्टरता को पकडे रहेंगे.

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