Wednesday, January 17, 2018
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ममता राज में बंगाल से आई चौंकाने वाली ख़बर – ख़ुफ़िया एजेंसियों के उड़े होश – भूल या बड़ी साज़िश ?

पश्चिम बंगाल से एक बड़ी ख़बर सामने आने के बाद ख़ुफ़िया एजेंसियों के होश उड़ गए हैं l वोटों की खातिर केंद्र की सलाह को दरकिनार करके ममता राज में रोहिंग्या मौज काट रहे हैं l ये ख़बर पढ़कर आपको ये अंदाज़ा हो जायेगा कि किस तरह से कांग्रेस ने पहले रोहिंग्याओं को देश में बसाया और अब ममता दीदी उन्हें भारत में रहने का परमिट दे रही हैं l

देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर पहले कांग्रेस राज में ये रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आये, और अब बंगाल में रोहिंग्याओं के पहचान पत्र बनाये जा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ये साफ़ कर चुकी है कि रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए भारी खतरा हो सकते हैं l गुरुवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल अपने हलफ़नामे में भी ये साफ़ कर दिया था कि रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इन्हें किसी भी हाल में देश से बाहर किया ही जाना चाहिए l केंद्र सरकार ने तो अपने हलफ़नामे में सुप्रीम कोर्ट से ये अपील भी कर डाली थी कि वो इस मामले में दख़ल न दे l

लेकिन इस सबसे इतर पश्चिम बंगाल से जो ख़बर आई है वो बेहद चौंकाने वाली है l क्या आप यकीन करेंगे कि कोलकाता में रोहिंग्या मुस्लिमों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाये जा रहे हैं? आपके लिए यकीन करना थोडा मुश्किल हो लेकिन ये सौ आने सच है l ममता के राज में रोहिंग्याओं के प्रमाण पत्र बनाने का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है l कोलकाता में रोहिंग्यों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाये जाने के रैकेट का तब खुलासा हुआ, जब 20 साल के मोहम्मद इस्माइल नाम के एक शख्स को हैदराबाद से गिरफ़्तार किया गया l

मोहम्मद इस्माइल नाम के इस अवैध रोहिंग्या घुसपैठिये के पास से केवल जन्म प्रमाण पत्र ही नहीं बल्कि इसके पास से पुलिस ने आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पैन कार्ड भी बरामद किये l इसे तब पकड़ा गया जब वो भारतीय पासपोर्ट बनाकर दुबई जाने की फिराक में था l

थाने में ले जाकर पुलिस ने जब डंडों से अच्छी तरह खातिरदारी की, तब इसने कबूला कि वो एक अवैध रोहिंग्या मुस्लिम है और वो 2014 में बांग्लादेश से होते हुए भारत आया था l आरोपी ने पुलिस को बताया कि वो जून, 2016 से हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ इलाके में रह रहा था l

आपको बता दें कि इस घुसपैठिये के पास से जो कागज़ात बरामद किये गए वो बंगाल में कोलकाता की दमदम नगरपालिका से उसके लिए जारी किये गए ताकि वोटबैंक की तरह इस्तमाल किया जा सके l यानि पूरी की पूरी साज़िश राजनीति के लिए हो रही है l आरोपी ने कबूल किया कि कोलकाता से वो दिल्ली गया और वहां एक साल तक रहा, इसके बाद कर्नाटक के बेलगाम में शिफ्ट हुआ और फिलहाल हैदराबाद में रह रहा था और यहाँ से भारतीय नागरिक की हैसियत से दुबई जाने की कोशिश कर रहा था l

आरोपी ने कबूला कि हैदराबाद में इसका मकान मालिक अब्दुल रशीद भी उसके पहचान पत्रों में पतों को बदलने में उसकी मदद कर रहा था l  इस सबसे एक बात तो साबित होती है कि ममता सरकार देश की सुरक्षा और अखण्डता के साथ समझौता कर रही है और ये एक बेहद गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है और आने वाले समय में देश को काफी भारी पड़ सकता है क्योंकि ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट्स से ये साबित हो चुका है कि रोहिंग्या मुस्लिमों का झुकाव धीरे-धीरे कट्टरपंथी आतंकी संगठनों के साथ साथ देश विरोधी गतिविधियों की ओर हो रहा है l

रोहिंग्या के इन मुस्लिमों का जन्म तो म्यांमार में हुआ था लेकिन हैरत की बात है कि इनके पास बंगाल के जन्म प्रमाणपत्र हैं यानि ममता के राज में बंगाल में रोहिंग्याओं पर मेहरबानी की जा रही है और वो भी दिल खोल के l

आपको बता दें कि क़रीब 3 महीने पहले ही जम्मू से पुलिस ने एक 65 साल के वृद्ध रोहिंग्या मुस्लिम को पकड़ा था l उम्र का तकाजा देख आपको भी बेचारे पे दया आ सकती है लेकिन उसके कुकर्मों के बारे में जान कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी l 65 साल का ये रोहिंग्या मुस्लिम लड़कियों की तस्करी करता था l

नूर-अल-इस्लाम नाम का ये रोहिंग्या मुस्लिम इतना बड़ा जल्लाद और निर्दयी था कि पकडे जाने से पहले उसकी आखिरी शिकार एक दुधमुही बच्ची थी l छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर बड़ी लड़कियों तक को इसने अपना शिकार बनाया था और अब तक 20 लड़कियों को बेच चुका था l पुलिस ने हवालात में जब डंडों से धुलाई की तब इसने कबूला कि वो बंगाल की मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था और फिर उन्हें जम्मू में बेच देता था l

बच्चों से लेकर बूढ़े रोहिंग्या तक अपराध की दुनिया से जुड़े हैं और भारत में हर तरफ फ़ैल कर गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं l यहाँ दो शब्दों पर आप ख़ास गौर फरमाइए, पहला बंगाल और दूसरा जम्मू. इस बात की जांच की जानी चाहिए कि आख़िर कौन लोग हैं वो, जो बंगाल की लड़कियों को जम्मू में बेचने के लिए नूर-अल-इस्लाम जैसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं l

अब सवाल ये है कि आख़िर क्यों बंगाल में ऐसा हो रहा है l क्या मोदी विरोध और अपने वोटबैंक की खातिर देश की सुरक्षा के लिए जिसे खतरा बताया जा रहा है, उनके प्रमाणपत्र बनाना सही है ? जब केंद्र सरकार साफ़ शब्दों में ये कह चुकी है कि रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इस बाबत बाक़ायदा सभी राज्यों को एक एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी है तो फिर ऐसा क्यों ? क्या ये सब महज़ एक चूक है या फिर इसके पीछे वोटबैंक की बड़ी साज़िश ? क्या ये एक भूल है या फिर सियासत का वो गन्दा खेल, जिसमें सिर्फ वोटबैंक दिखाई देता है, इसके अलावा और कुछ नहीं ?

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