Wednesday, January 17, 2018
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तीन तलाक़ के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया एक और ज़बरदस्त फ़ैसला – अलगाववादियों के छूटे पसीने – पत्थरबाजों में पसरा मातम

सुप्रीम कोर्ट लगातार कमाल दिखा रहा है l अभी तक कट्टरपंथी तीन तलाक़ के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर रो रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर से जुड़ा एक और अहम् फ़ैसला सुना दिया l मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश में तीन तलाक़ को लेकर ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया और 5 जजों की बेंच में से 3 जजों ने देश में 3 तलाक़ को असंवैधानिक क़रार दे दिया l इसके बाद देश में फौरी तौर से तीन तलाक़ पर रोक लग गयी l

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर कट्टरपंथी नाक भौं सिकोड़ ही रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा एक्शन ले लिया l उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जम्मू कश्मीर में उस समय तक सार्थक बातचीत संभव नहीं है जब तक कि घाटी में हिंसा नहीं थमती । प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे एस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘‘किससे बातचीत की जाए? जब तक हिंसा नहीं रुकती, कोई बातचीत नहीं हो सकती।’’ शीर्ष अदालत जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ बार एसोसिएशन कार्यकारी सदस्य की अपील पर सुनवाई कर रही थी।

उच्च न्यायालय ने बार निकाय की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस आधार पर पैलेट गन के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गयी थी कि केंद्र ने पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए पहले ही विशेषज्ञों की एक समिति गठित की है । न्यायालय ने कहा कि मामले पर फैसले के दो तरीके हैं, या तो पार्टियां एक साथ बैठें और कोई समाधान निकालें या अदालत मामले का फ़ैसला करे । न्यायालय ने कहा कि बार एक ‘‘जिम्मेदार और सम्मानित’ निकाय है तथा उसे कोई समाधान ढूंढने में मदद करनी चाहिए। अदालत ने याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए चार अक्तूबर की तारीख़ तय की है।

दरअसल पत्थरबाजी की घटनाओं के कारण सुरक्षाबलों की जान को ख़तरा बढ़ रहा है l पत्थरबाज आतंकियों की भागने में सहायता भी करते हैं, ऐसे में सेना के पास तो एक ही चारा बचता है कि वो पत्थरबाजी करने वालों को गोली मार दे, लेकिन ऐसा करने की जगह सरकार ने फ़ैसला लिया था कि पेलेट गन का इस्तमाल किया जाए l

लेकिन अफ़सोस ये कि सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ भी आवाजें उतनी शुरू हो गयीं l जम्मू-कश्मीर बार असोसिएशन के ऐग्जिक्यूटिव मेंबर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि घाटी में सुरक्षाबलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाए, मगर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ये कहते हुए रद्द कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर में हिंसा और संघर्ष थम नहीं जाता तब तक किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती और बातचीत का तो सवाल ही नहीं उठता l

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि बात करके मसले का समाधान निकाला जाना चाहिए, जिसपर चीफ जस्टिस जेएस खेहर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सवालिया अंदाज में कहा, ‘किससे बात करें? हिंसा रुकने से पहले किसी भी तरह की बातचीत नहीं की जा सकती.’l

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बार असोसिएशन को फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक जिम्मेदार और सम्मानित संस्था है, आपको मामले के समाधान के लिए कोशिश करनी चाहिए l सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने बार काउंसिल की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग तो जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को ही ‘रहस्यमय’ बता रहे हैं l

रंजीत कुमार ने कहा, ‘ये लोग जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं और उसे रहस्यमय बता रहे हैं.’ l उन्होंने कहा कि बार असोसिएशन को कुछ सुझाव देने चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है जबकि केंद्र सरकार सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है l

आपको बता दें कि इससे पहले पिछले साल 22 सितंबर को हाईकोर्ट ने भी बार असोसिएशन की पेलेट गनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था l बार एसोसिएशन का कहना था कि खुद केंद्र सरकार ने पेलेट गन के इस्तेमाल पर विचार करने के लिए एक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया है l

आप खुद ही सोचिए कि कश्मीर की बार एसोसिएशन जैसी संस्था भी पत्थरबाजों के समर्थन में आ गयी लेकिन इन्हें ये कतई नहीं लगा कि सेना अपनी जान पर खेलकर आतंकियों को पकडती है,कश्मीरियों को हर मुसीबत से बचाती है लेकिन जिस सेना पर ये पत्थरबाज़ पत्थर बरसाते हैं, उनका साथ आख़िर क्यों देना ?

खैर अब इस ख़बर के बाद कश्मीरी जिहादियों और अलगाववादियों का रोना छूट गया है और पत्थरबाज भी सडकों से गायब हो गए हैं l बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद सुरक्षाबल अब पेलेट गन का इस्तमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं और पत्थरबाजों की अब खैर नहीं l अलगाववादी तो पहले से ही एनआईए जांच के शिकंजे में हैं l कह सकते हैं कि कश्मीर अब एक नयी दिशा की ओर तेजी से बढ़ रहा है l

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