Wednesday, January 17, 2018
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टू-जी फ़ैसले पर जश्न मनाती कांग्रेस को स्वामी ने दिया तगड़ा झटका – किया ऐसा कि दंग रह गयी पूरी पार्टी – अब नहीं बचेंगे देश के 30 हज़ार करोड़ डकारने वाले

यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए टू-जी घोटाले में आज सीबीआई कोर्ट ने अपना एक लाइन का फ़ैसला सुनाते हुए इस घोटाले से जुड़े तमाम आरोपियों को बरी कर दिया l यूपीए-2 के समय हुए बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन केस पर पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुवार को अपना फ़ैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी को बरी कर दिया।

कोर्ट का ये फ़ैसला आते ही डीएमके नेताओं और कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी l दिल्ली से लेकर चेन्नई तक जश्न मनाया जाना शुरू हो गया l उधर कांग्रेसी नेता भी बेहद ख़ुशी में दिखाई दिए और राज्यसभा तक में जमकर हंगामा काटा गया l गुलाम नबी आज़ाद ने जहाँ राज्यसभा में इस मामले को उठाया तो वहीँ कपिल सिब्बल और मनमोहन सिंह भी मीडिया के सामने आया गए l कांग्रेसी नेताओं की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और ऐसे खुश हो रहे थे, मानो कोई बहुत बड़ी चीज़ हाथ लग गयी हो l

शायद कांग्रेस ये भूल गयी कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना था कि नियम के विरुद्ध काम किये गए l ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे कांग्रेसी नेता ये भूल गए कि इस फ़ैसले को अंतिम नहीं कहा जा सकता और इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है l

खुश होती कांग्रेस को एक झटका सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दे दिया l फैसले के बाद स्वामी ने कहा कि वह फैसले से निराश नहीं हैं और सरकार को इस मामले में ऊपर की अदालत में अपील करना चाहिए।

इतना ही नहीं स्वामी ने जयललिता के केस का उदाहरण देते हुए अपनी जीत का भरोसा भी जताया। उन्होंने कहा, ‘फैसले के खिलाफ सरकार को उच्च न्यायालय में अपील करनी चाहिए। मैं बता दूं कि जयललिता के केस में भी हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने उस वक्त भी हाई कोर्ट के फैसले के बाद जश्न मनाया था।’

स्वामी ने यह भी कहा कि अभी उन्होंने पूरा फैसला नहीं पढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे मीडिया के माध्यम से ही फैसले के बारे में पता चला है। मैं पूरी कॉपी पढ़ने का इंतजार कर रहा हूं ताकि उसके बाद आगे की रणनीति तय कर सकूं।’ बता दें कि स्वामी टू-जी केस से पहले भी कई चर्चित पीआईएल डाल चुके हैं। तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता के आय से अधिक संपत्ति पर भी उन्होंने याचिका दायर की थी।

आपको बता दें कि इस केस का श्रेय सुब्रमण्यन स्वामी को जाता है जिनकी जनहित याचिका पर ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

वैसे खुश होती कांग्रेस के नेता शायद ही इस बात का जवाब दे पाएं कि आख़िर देश के 30 हज़ार करोड़ रुपये गए कहाँ ? यदि टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में घोटाला नहीं हुआ तो 30 हज़ार रुपये आख़िर गए तो कहाँ ? अगर कुछ बिन्दुओं में इसे समझें तो …..

  • 6 साल तक चले इस मामले में ओ. पी. सैनी की स्पेशल कोर्ट से यह फैसला आएगा। 2G केस में सुनवाई के दौरान कई नाटकीय तर्क देखने को मिले थे। सीबीआई के वकील ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर और मुख्य आरोपी ए. राजा को ‘बड़ा झूठा’ बताया था जबकि राजा ने कहा था कि एजेंसियां रस्सी को सांप बता रही हैं।
  • नवंबर 2010 में CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद 2G मामला सुर्खियों में आया। इसमें बताया गया कि सरकार को 1.76 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। कई अखबारों ने छोटी हेडिंग के लिए केवल 1,76,00,00,000,000 रुपया ही लिखा था।
  • स्पेशल जज सैनी के समक्ष तीन मामले आए, दो सीबीआई ने रजिस्टर किए थे जबकि एक ED ने। CBI के पहले केस में राजा और कनिमोझी को मुख्य आरोपी बताया गया। आरोप लगा कि राजा के मंत्री रहते दूरसंचार मंत्रालय ने पहले आवेदन करने की डेडलाइन 1 अक्टूबर 2007 तय की। इसके बाद आवेदन प्राप्त करने की कट-ऑफ डेट बदलने से 575 में से 408 आवेदक रेस से बाहर हो गए।
  • दूसरा आरोप लगा कि ‘पहले आओ पहले पाओ’ की पॉलिसी का उल्लंघन किया गया। तीसरा आरोप, उन कंपनियों की योग्यता पर सवाल उठाए गए, जिनके पास कोई अनुभव नहीं था। चौथा आरोप, नए ऑपरेटरों के लिए एंट्री फी का संशोधन नहीं हुआ।
  • कई बार राजा ने कोर्ट में यह कहा कि उन्होंने जो भी बड़े फैसले लिए, उसकी जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी थी। उन्होंने कहा था कि TRAI ने ‘अनुभव’ वाले प्रावधान को खत्म कर दिया था। उनका दावा था कि प्राधिकरण ने कहा था कि जो भी फर्म 1650 करोड़ रुपये जमा करेगी वह स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल होने के योग्य होगी।
  • राजा के तमाम सनसनीखेज आरोपों पर CBI ने उन्हें बड़ा झूठा बताते हुए सबसे बड़ा आरोपी बताया जिसने अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस बांट दिए। प्रवर्तन निदेशालय ने अपने मामले में अप्रैल 2014 में 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जिनमें राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, करीम मोरानी और शरद कुमार शामिल हैं।
  • राजा के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते हैं तो उन्हें उम्रकैद की सजा हो सकती है। ED का कहना है कि कलाइगनर टीवी और DB Realty के बीच 200 करोड़ के ट्रांजैक्शन हुए। यह पैसा Dynamix Realty से कुसेगांव फ्रूट्स ऐंड वेजीटेबल्स और सिनेयुग फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड से होकर कलाइगनर टीवी तक पहुंचा। CAG की रिपोर्ट में सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। बाद में सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में 30 हजार करोड़ के नुकसान की बात दिखाई गई।
  • कनिमोझी के वकील ने कहा है कि CBI और ED द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘2G केस GSM और CDMA ऑपरेटरों के बीच का विवाद (COAI vs AUSPI) है। दूसरों को भी इससे नुकसान हुआ।’ COAI सेलुलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया है जबकि AUSPI असोसिएशन ऑफ यूनिफाइड टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया है।
  • DMK चीफ एम. करुणानिधि की पत्नी से उनके घर पर पूछताछ हुई और सिनेयुग के दफ्तर परिसर से शेयर समझौते की मूल प्रति बरामद हुई। पहले मामले में राजा और कनिमोझी के साथ-साथ पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के तत्कालीन निजी सचिव आर के चंदोलिया, स्वान टेलीकाम के प्रवर्तक शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, रिलायंस धीरुभाई अंबानी ग्रुप (आरएडीएजी) के तीन आला अधिकारी-गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपारा और हरी नायर आरोपी बनाए गए थे।
  • मामले के अन्य आरोपियों में कुसेगांव फ्रूट्स ऐंड वेजिटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, कलाइगनर टीवी के निदेशक शरद कुमार और बॉलिवुड के निर्माता करीम मोरानी भी हैं। दूरसंचार कंपनी स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिटेक वायरलैस (तमिलनाडु) भी मामले में आरोपी हैं। दूसरे सीबीआई मामले में एस्सार ग्रुप के प्रवर्तक रवि रुइया और अंशुमान रुइया, लूप टेलकाम की प्रवर्तक किरण खेतान और उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के निदेशक विकास सर्राफा आरोपी हैं।

उधर फ़ैसले के बाद बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच फैसले के बाद घमासान जारी है। एक तरफ कांग्रेस जहां बीजेपी और पीएम मोदी के साथ तत्कालीन कैग विनोद राय पर निशाना साध रही है तो बीजेपी की तरफ से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रतिक्रिया दी है।

2G मामले पर सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस के हमले का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली सामने आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘2G लाइसेंस आवंटन में यूपीए सरकार की तरफ से भ्रष्टाचार किया गया था।’ उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी आवंटन प्रक्रिया को गलत माना था। कांग्रेस नेताओं के आक्रामक रुख को लेकर जेटली ने तंज कसा कि फैसले को तमगा मानकर कांग्रेस खुश हो रही है।

उधर, जेटली की प्रतिक्रिया के फौरन बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अरुण जेटली झूठों के सरदार हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘झूठ के काले बादल छंट गए। सीबीआई कोर्ट ने साबित किया कि सत्य की जीत हुई। मोदीजी, बीजेपी, विनोद राय ने साजिश रची जिसे बेनकाब कर दिया गया। क्या वे सभी देश से माफी मांगेंगे।’ उन्होंने कहा कि झूठ को सीढ़ी बनाकर बीजेपी सत्ता तक पहुंची।

गौरतलब है कि यूपीए-2 सरकार के शासनकाल में 2 जी घोटाले को लेकर जमकर घमासान मचा था। बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। सीबीआई की विशेष अदालत ने अब इस केस में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इसके बाद से कांग्रेस नेताओं के निशाने पर मोदी सरकार और बीजेपी है। जेटली ने तत्कालीन यूपीए सरकार पर इस पूरे प्रकरण में बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देने की बात कही है।

जेटली ने कहा कि  ‘कांग्रेस पार्टी इस फैसले को सम्मान के प्रतीक के तौर पर लेकर चल रही है जबकि हकीकत यह है कि इस पूरे प्रकरण में घोर अनियमितताएं बरती गईं। कांग्रेस इसे अपनी बेगुनाही का सर्टिफिकेट न माने। लाइसेंस आवंटन के लिए यूपीए सरकार का तरीका भ्रष्ट और बेईमानी वाला था जिसे 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ही खत्म किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवंटन प्रक्रिया में बरती गई अनियमितता के आधार पर इसे खत्म किया था।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘2007-08 स्पेक्ट्रम आवंटन का आधार उस वक्त की बाजार कीमतों के आधार पर नहीं दिया गया। उस वक्त की यूपीए सरकार ने 2001 की कीमतों के आधार पर लाइसेंस आवंटित किए। आवंटन नीलामी के जरिए नहीं बल्कि फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व के आधार पर किया गया। स्पष्ट तौर पर लाइसेंस आवंटन में निजी हितों को तरजीह दी गई।

इतना ही नहीं जेटली ने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेता कोर्ट के फैसले को चाहे अपने लिए सम्मान का प्रतीक मानते हों, हकीकत इससे उलट है। आपको बता दें कि फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता इसे अपनी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार का जवाब बता रहे हैं।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा, ‘हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। यूपीए सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। कोर्ट के फैसले से आरोप बेबुनियाद साबित हुए। खराब नीयत से आरोप लगाए गए थे।’ कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि पूर्व सीएजी विनोद राय को देश से माफी मांगनी चाहिए। बता दें कि विनोद राय इस वक्त बीसीसीआई के प्रशासक समिति (सीओए) के प्रमुख हैं। ‘

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