Friday, December 15, 2017
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पाकिस्तान को भारत ने दिया क़रारा जवाब – महज़ 60 मिनट में दी ऐसी मात कि देखता रह गया पाकिस्तान

पाक की नापाक हरक़तों का मुहंतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सेना ने ऐसा ज़बरदस्त जवाब दिया कि पाक देखता रह गया l महज़ 1 घंटे में तैयार हुए भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ कर रख दी थी l जी हाँ सिर्फ 1 घंटे में भारतीय वायुसेना के विमान न सिर्फ तैयार हुए बल्कि पाकिस्तान पर हमला भी कर दिया गया था और इसके हीरो थे मार्शल अर्जन सिंह l

शनिवार 16 सितम्बर को भारत माँ ने एक वीर सपूत को खो दिया  लेकिन उनसे जुड़े किस्से, उनकी बहादुरी की बातों को जब आप सुनेंगे तो आपका सीना फक्र से चौड़ा हो जायेगा l एक अकेले भारतीय ने पाकिस्तान को तो धूल चटाई ही, साथ ही ऐसे कई कारनामे किये जिन्हें सिर्फ अर्जन सिंह ही कर सकते थे l

98 साल के अर्जन सिंह ने शनिवार रात 7 बजकर 47 मिनट पर आखिरी सांस ली। शनिवार सुबह हृदयाघात के बाद उन्हें राजधानी स्थित आर्मी अस्पताल (रिसर्च ऐंड रेफरल) में दाखिल कराया गया था। सरकार का कहना है कि अर्जन सिंह भारत की नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत रहे हैं और आगे भी बने रहेंगे।

उनके निधन से पहले पीएम मोदी ने अस्पताल जाकर अर्जन सिंह जी से मुलाक़ात करते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की थी लेकिन कुछ घंटों बाद ही अर्जन सिंह जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया l

अर्जन सिंह जी को नमन करते हुए हम आपसे कुछ ऐसे ही किस्से साझा करना चाहते हैं, जिन्हें हर भारतवासी को पता होना चाहिए l बात सबसे पहले भारत पाकिस्तान के बीच हुई 1965 की जंग की l

सितंबर 1965 की बात है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत भारत पर हमला बोल दिया था और अखनूर जैसे अहम शहर को निशाना बनाया गया l तब के रक्षा मंत्री ने वायु सेना प्रमुख रहे अर्जन सिंह को अपने दफ़्तर में बुलाया और एयर सपॉर्ट मांगा। अर्जन सिंह से पूछा गया कि वायु सेना को तैयारी में कितना वक़्त लगेगा। इसके जवाब में अर्जन सिंह ने कहा – एक घंटा। ये बात न सिर्फ उन्होंने कही बल्कि इसको करके भी दिखाया l अपनी बात को कायम रखते हुए वायु सेना ने एक घंटे के अंदर पाकिस्तान पर हमला बोल दिया।

दरअसल ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति और जनरल अयूब खान ने जबरन कश्मीर पर कब्जा करने की योजना बनाई l जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह हमला कश्मीर पर कब्जा करने के लिए सक्षम था, लेकिन जनरल अयूब खान ने भारतीय सेना और भारतीय एयरफोर्स की क्षमता को कमतर आंक कर अपनी योजना बनाई थी l लिहाजा, हमले के पहले घंटे में ही हुए इंडियन एयरफोर्स के हमले से पाकिस्तान का पूरा प्लान फेल हो गया l

पाकिस्तानी हमले की ख़बर पाते ही रक्षा मंत्रालय ने सभी सेना प्रमुखों को तलब किया और कुछ मिनटों की इस मुलाकात में अर्जन सिंह से पूछा गया कि वह कितनी जल्दी पाकिस्तान के बढ़ते टैंकों को रोकने के लिए एयर फोर्स का हमला कर सकते हैं l अर्जन सिंह ने रक्षा मंत्रालय से हमला करने के लिए सिर्फ एक घंटे का समय मांगा l

वादे के मुताबिक अर्जन सिंह अपनी बात पर खरे उतरे और अखनूर की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तानी टैंक और सेना के खिलाफ पहला हवाई हमला 1 घंटे से भी कम समय में कर दिया l इसके बाद पूरी जंग के दौरान अर्जन सिंह ने वायु सेना को शानदार नेतृत्व दिया और कई बाधाओं के बावजूद उन्होंने जीत दिलाई। इस योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण तो दिया ही गया, उनका चीफ ऑफ एयर स्टाफ का दर्जा बढ़ाकर एयर चीफ मार्शल कर दिया गया।

वह भारतीय वायु सेना के पहले एयर चीफ मार्शल बने और इससे भी बड़ी बात यह कि 2002 में भारत सरकार ने उन्हें मार्शल रैंक से नवाजा और इस तरह वह एयर फोर्स के पहले और एकमात्र फाइव स्टार रैंक अफसर बने।

एक बार अर्जन सिंह को कोर्ट मार्शल का सामना भी करना पड़ा था l  यह वक़्त था आजादी से पहले का, जब सेना की कमान अंग्रेजों के हाथों में थी l युवा अर्जन सिंह ने फरवरी 1945 में केरल के एक घर के ऊपर बहुत नीची उड़ान भरी और इसके बाद उन्हें वायुसेना का नियम तोड़ने के आरोप का सामना करना पड़ा l

उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने सिविलियन की जानों को भी जोखिम में डाला l हालांकि अर्जन सिंह ने कोर्ट मार्शल का डटकर सामना किया और उन्होंने अपने बचाव में जो बात कही, उसके बाद उनका कोर्ट मार्शल नहीं हुआ l

ख़बरों के मुताबिक़ उस वक़्त अर्जन सिंह  कन्नूर केंट एयर स्ट्रीप पर तैनात थे l उन्होंने उड़ान भरी और एयरक्राफ्ट लेकर सीधे कॉरपोरेल के घर के ऊपर पहुंच गए l उन्होंने जहाज को काफी नीचे उड़ाया और कई बार कॉरपोरेल के घर के चक्कर लगाए l ऐसे में न सिर्फ कॉरपोरेल के घरवाले सड़कों पर निकल आएं बल्कि पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया और ट्रैफि‍क जाम लग गया l आपको बता दें कि उस समय हवाई जहाज देखना एक बड़ी बात होती थी और वहां के लोगों ने इससे पहले सिर्फ एक बार हवाई जहाज देखा था l

यह लोगों के लिए तो काफी मजे की बात थी, लेकिन ब्र‍िटिश प्रशासन को यह बात पसंद नहीं आई और शिकायत ऊंचे अफसरों तक पहुंची और अर्जन सिंह को कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा l हालांकि उस समय ट्रेंड पायलट की संख्या काफी कम होती थी और दूसरे विश्व युद्ध की वज़ह से ऐसे भी ब्र‍िटिश सेना को काबि‍ल पायलटों की जरूरत थी l ऐसे में ब्र‍िटिश सेना चाहकर भी अर्जन सिंह जैसे टैलेंटेड पायलट का कोर्ट मार्शल नहीं कर पाई l

कोर्ट मार्शल का सामना करने के दौरान अर्जन सिंह ने बहस करते हुए कहा था कि उन्होंने ट्रेनी पायलट का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा किया था l आपको बता दें कि कहा जाता है कि यह ट्रेनी  पायलट कोई और नहीं बल्कि आगे चलकर एयर चीफ मार्शल बनने वाले एयर चीफ मार्शल दिलबाग सिंह थे l दिलबाग सिंह 1981 से 1984 तक भारतीय वायु सेना के प्रमुख थे और वे अर्जन सिंह के बाद दूसरे सिख थे जो भारतीय वायुसेनाध्यक्ष बने l दिलबाग सिंह को 1944 में एक पायलट के रूप में नियुक्त किया गया था l

आपको बता दें कि अर्जन सिंह अपनी बहादूरी और कभी हार न मानने वाले जज्बे के लिए जाने जाते थे l भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 के समय चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे अर्जन सिंह  की कुशल नेतृत्व और दृढ़ता के साथ स्थिति का सामना करते हुए भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई. बी. चव्हाण ने कहा था, ‘एयर मार्शल अर्जन सिंह हीरा हैं, वह अपने काम में दक्ष और दृढ़ होने के साथ सक्षम नेतृत्व के धनी हैं.’l

अर्जन सिंह ने महज 44 साल की उम्र में वायु सेना चीफ बनने की उपलब्धि हासिल की थी। 1962 में चीन से जंग का जब आखिरी दौर चल रहा था, तब वह डेप्युटी चीफ ऑफ एयर स्टाफ नियुक्त हुए थे और 1963 में ही वाइस चीफ बन गए।

जब देश आजाद हुआ था तो उन्हें वायु सेना के 100 से ज्यादा विमानों के फ्लाई पास्ट की अगुवाई करने का सम्मान मिला। उन्हें 60 से ज्यादा किस्म के विमानों को उड़ाने का अनुभव था, जिनमें कई द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के जमाने के थे।

गौरतलब है अर्जन सिंह पहले वायु सेना प्रमुख बने जो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की रैंक तक फ्लाइंग कैटेगरी के फाइटर पायलट रहे l अपने वायुसेना के करियर के दौरान अर्जन सिंह द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ 60 अलग-अलग तरह के विमानों को उड़ा चुके थे l

अर्जन सिंह ने मौजूदा दौर के नैट और वैमपायर विमानों के साथ-साथ सुपर ट्रांस्पोर्टर विमानों पर भी उड़ान भरी थी l वायु सेना में अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में भी वह विमान उड़ाते रहे। जुलाई 1969 में रिटायर होने के बाद वे स्विट्जरलैंड के राजदूत बनाए गए थे। 1989 से 1990 के बीच वह दिल्ली के उप-राज्यपाल भी रहे। पानागढ़ स्थित एयर फोर्स स्टेशन का नाम उनके नाम पर रखा गया है।

भारत माँ के सपूत, महान योद्धा और कुशल रणनीतिकार अर्जन सिंह भुल्लर को न्यूज़ स्पिरिट टीम की तरफ से भावभीनी श्रद्धांजलि – आपको शत शत नमन….

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