Wednesday, January 17, 2018
Home > देश > योगी सरकार के यूपीकोका के ये हैं नियम और प्रावधान – अपराधियों में दहशत – बचाव में उतरे अखिलेश और आज़म ने कहा….

योगी सरकार के यूपीकोका के ये हैं नियम और प्रावधान – अपराधियों में दहशत – बचाव में उतरे अखिलेश और आज़म ने कहा….

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जहाँ सूबे में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुरजोर कोशिश में लगी है तो वहीँ विपक्ष में बैठे सपा और बसपा के नेता इसका विरोध करने में लगे हैं l योगी सरकार अपराधियों की नाक में दम करने के लिए जिस सख्त कानून को सूबे में लागू करवाने की पूरी कोशिश में हैं तो अब अखिलेश और आज़म जैसे नेताओं ने इस क़ानून का विरोध शुरू कर दिया है l

उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार यूपीकोका (UPCOCA) कानून लाने जा रही है और विवादों के बीच बुधवार को यूपीकोका (उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) बिल विधानसभा में पेश किया गया l

नए कानून के तहत अंडरवर्ल्ड, जबरन वसूली, जबरन मकान और जमीन पर कब्जा, वेश्यावृत्ति, अपहरण, फिरौती, धमकी, तस्करी, जैसे अपराधों को शामिल किया जाएगा l

वहीँ आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने जब यूपीकोका का मसौदा तैयार किया और इसे कानूनी रूप देने की मंशा जाहिर तो इसका विरोध होने लगा l विपक्षी दलों समेत मुस्लिम संगठनों की तरफ से इस प्रस्तावित कानून को एक मुस्लिम समुदाय को टारगेट करने का कदम करार दिया गया l

राज्य के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी समेत दूसरे दलों ने योगी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं l वहीं मुस्लिमों की पैरोकारी करने वाले संगठन भी इसकी मुखालफत में खड़े नजर आ रहे हैं l कहा जा रहा है कि एक खास समुदाय को टारगेट करने के लिए इस कड़े कानून अमल में लाने का कदम उठाया गया l

हालांकि, प्रस्तावित बिल के मसौदे के आधार पर अलग-अलग तरह के अपराधों पर लगाम लगाने की बात कही जा रही है और प्रस्तावित मसौदे में गुंडागर्दी और संगठित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है l संगठित अपराध की श्रेणी में रंगदारी और ठेकेदारी में गुंडागर्दी को भी शामिल किया गया है और इसके साथ ही गैरकानूनी तरीके से कमाई गई संपत्ति भी इस कानून के दायरे में शामिल होगी l इस कानून के तहत ऐसी संपत्ति को जब्त भी किया जा सकता है l

इसके अलावा यूपीकोका से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएंगी, जिससे ये सुनिश्चित किया जाएगा कि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके l इस कानून के तहत आने आपराधिक मामलों की निगरानी खुद राज्य के गृह सचिव करेंगे l

प्रस्तावित कानून के मसौदे से भी कानून के दुरुयोग की आशंका जाहिर होती है और ऐसे में नए कानून में इस बात के लिए भी नियम बनाए गए हैं कि उसका गलत इस्तेमाल न हो सके l केस दर्ज होने और जांच के लिए नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत राज्य स्तर पर ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग खुद गृह सचिव करेंगे और मंडल के स्तर पर आईजी रैंक के अधिकारी की संस्तुति के बाद ही मामला दर्ज किया जाएगा l

जिला स्तर पर अगर कोई संगठित अपराध करने वाला अपराधी है तो उसकी रिपोर्ट कमिश्नर, जिलाधिकारी देंगे जिसके बाद फ़ैसला किया जाएगा कि आरोपी के ख़िलाफ़ यूपीकोका कानून लगे या नहीं l

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरा ऐसा प्रदेश है, जो इतना सख़्त कानून लागू करने जा रहा है l नए यूपीकोका (UPCOCA) यानि उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट के तहत ये  प्रावधान हैं-

  1. किसी भी तरह का संगठित अपराध करना वाला व्यक्ति इस कानून की जद में आएगा l
  2. इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 6 महीने तक जमानत नहीं मिलेगी l
  3. इस कानून के तहत केस तभी दर्ज होगा, जब आरोपी कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो. उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई हो l
  4. यूपीकोका में गिरफ्तार अपराधी के खिलाफ चार्जशीट दाख़िल करने के लिये 180 दिन का समय मिलेगा जबकि अभी तक के कानूनों में 60 से 90 दिन ही मिलते हैं l
  5. यूपीकोका के तहत पुलिस आरोपी की रिमांड 30 दिन के लिए ले सकती है, जबकि बाकी कानूनों में 15 दिन की रिमांड ही मिलती है l

  1. इस कानून के तहत कम से कम अपराधी को पांच साल की सजा मिल सकती है और अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान होगा l
  2. इतने सख्त कानून का दुरुपयोग ना हो, ये तय करने के लिए यूपीकोका के मामलों में केस दर्ज करने और जांच करने के लिए भी अलग नियम बनाये गए हैं l
  3. राज्य स्तर पर ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग गृह सचिव करेंगे l
  4. मंडल के स्तर पर आईजी रैंक के अधिकारी की संस्तुति के बाद ही केस दर्ज किया जाएगा l
  5. – जिला स्तर पर यदि कोई संगठित अपराध करने वाला है, तो उसकी रिपोर्ट कमिश्नर, डीएम देंगे
  6. अब योगी सरकार की सूबे से अपराध को ख़त्म करने की कवायद शुरू होते ही विपक्ष ने इसका विरोध भी करना शुरू कर दिया है l विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी का कहना है कि इस कानून का दुरूपयोग सरकार विरोधियों को दबाने के लिए कर सकती है l बहरहाल उत्तर प्रदेश विधान सभा के शीतकालीन सत्र के दौरान ही योगी सरकार इस नए कानून को हर हाल में लागू करना चाहती है l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *